सूबे में बिजली की व्यवस्था के मसले पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल के बीच मंगलवार को एक अहम बैठक होगी।
इससे पूर्व ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने केंद्र व राज्य सरकार के सामने सात अहम मुद्दे रखते हुए इन पर समाधान निकालने का आग्रह किया है। कहा, यूपी में बिजली सुधार के लिए राजनीति से ऊपर उठकर फैसले किए जाएं।
फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे व विद्युत अभियंता संघ के महासचिव डीसी दीक्षित ने कहा कि निजी घरानों पर अति निर्भरता के चलते पिछले दो दशकों में प्रदेश की बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
पिछले दस वर्षों में प्रदेश में निजी क्षेत्र को लगभग 16,610 मेगावाट क्षमता की नई बिजली परियोजनाएं दी गईं लेकिन इन परियोजनाओं पर काम नहीं शुरू हुआ।
जबकि इस दौरान सार्वजनिक क्षेत्र में अनपरा डी, पारीछा व हरदुआगंज में नई इकाइयां लग गई और उत्पादन भी शुरू हो गया।
अगर 16,610 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं में से आधी भी सरकारी क्षेत्र को दी गई होतीं तो वे पूरी हो जाती और प्रदेश बिजली के मामले में आत्म निर्भर होता। अभी बिजली की मांग और आपूर्ति में 3,000 मेगावाट का अंतर है। लिहाजा ऊर्जा नीति में बदलाव पहली जरूरत है।