अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (अपटेल) के जरिये गुपचुप रेग्युलेटरी सरचार्ज बढ़वाने का दांव पावर कॉर्पोरेशन को उल्टा पड़ गया।
देर से अपील दायर करने पर अपटेल ने पावर कॉर्पोरेशन पर एक लाख रुपये की पेनल्टी ठोकते हुए दो अलग-अलग चैरिटेबल संस्थाओं में जमा कराने का आदेश दिया है।
अपटेल ने 12 मई से पहले पैसा जमा कराने को कहा है। याचिका स्वीकार करने के बारे में अपटेल 22 मई को अनुपालन रिपोर्ट मिलने के बाद निर्देश देगा।
राज्य विद्युत नियामक आयोग ने पिछले साल मई में जारी टैरिफ ऑर्डर में प्रदेश के उपभोक्ताओं पर 31 मार्च 14 तक 3.71 प्रतिशत रेग्युलेटरी सरचार्ज लगाने की अनुमति दी थी।
देर से दी याचिका
पावर कॉर्पोरेशन ने रेग्युलेटरी सरचार्ज और बढ़वाने के लिए अपटेल के समक्ष याचिका दायर की थी। कानूनन टैरिफ ऑर्डर जारी होने के 90 दिन के भीतर याचिका दायर कर दी जानी चाहिए। पावर कॉर्पोरेशन ने 131 दिन विलंब से याचिका दायर की।
दोबारा 71 दिन विलंब से याचिका दायर (रिफाइलिंग) की गई। 25 अप्रैल को अपटेल ने इस मामले की सुनवाई करते हुए दोनों याचिकाओं को विलंब से दायर किए जाने के लिए कॉर्पोरेशन पर एक लाख रुपये की पेनल्टी लगाई है।
131 दिन विलंब के लिए दिल्ली के ग्रेटर कैलाश एनक्लेव-2 स्थित चैरिटेबल संस्था ‘होप एक आशा’ को 75 हजार रुपये तथा 71 दिन विलंब से रिफाइलिंग के लिए दिल्ली की ही तुगलकाबाद एक्सटेंशन स्थित चैरिटेबिल संस्था अल्जीमर एंड रिलेटेड डिसऑर्डर्स सोसायटी ऑफ इंडिया (एआरडीएसआई) को 25 हजार रुपये का भुगतान करने को कहा है।
पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों का कहना है कि अपटेल के आदेश का परीक्षण कराया जा रहा है। कानूनी पहलुओं को देखते हुए आगे कार्यवाही की जाएगी।
उपभोक्ता परिषद सक्रिय
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने अपीलेट ट्रिब्यूनल के आदेश का स्वागत करते हुए कहा है कि इस मामले में वह भी उपभोक्ताओं की तरफ से अपटेल के समक्ष अपना पक्ष रखेगी।
ट्रिब्यूनल से इस याचिका को खारिज करने की मांग की जाएगी। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उन्होंने काफी पहले ही यह खुलासा किया था कि प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं पर बड़ा बोझ डालने के लिए रेग्युलेटरी सरचार्ज में और बढ़ोतरी का षड्यंत्र रचा जा रहा है।
यह सरकार की छवि धूमिल करने की कोशिश है। उपभोक्ता परिषद कॉर्पोरेशन का यह मंसूबा कामयाब नहीं होने देगी।