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परफॉर्मेंस सुधार में फेल हुईं बिजली कंपनियां

Thu, 05 Mar 2015 11:36 PM IST
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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राज्य विद्युत नियामक आयोग की ओर से इस साल के लिए तय परफॉर्मेंस सुधार के मानकों को पूरा करने में बिजली कंपनियां सफल नहीं हो पाई हैं। ऐसे में आयोग पर भी वादे के मुताबिक दरों में कमी करने का दबाव बढ़ गया है।
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बिजली दरों के निर्धारण की प्रक्रिया शुरू करने से पहले आयोग ने एक बार फिर पावर कॉर्पोरेशन और बिजली कंपनियों को सवालों की लंबी-चौड़ी फेहरिस्त भेजकर पूछा है कि बीते साल अक्तूबर में टैरिफ ऑर्डर के साथ तय किए गए लक्ष्यों की क्या प्रगति है?

साथ ही कॉर्पोरेशन द्वारा बिजली कंपनियों की तरफ से जारी वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) व टैरिफ प्रस्ताव के कई बिंदुओं पर भी स्पष्टीकरण मांगा है।

गौरतलब है कि पिछले साल अक्तूबर में टैरिफ ऑर्डर जारी करते समय विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन देश दीपक वर्मा ने स्पष्ट रूप से कहा था कि अगर बिजली कंपनियां लाइन हानियों में कमी, नए कनेक्शन जारी करने तथा शत प्रतिशत मीटरिंग का लक्ष्य पूरा करने में विफल रहती हैं तो अगले साल बिजली दरों में बढ़ोतरी की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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उल्टे बिजली की दरें स्वत: कम हो जाएंगी। पिछले महीने नियामक आयोग की समीक्षा में बिजली कंपनियों की परफॉर्मेंस संतोषजनक नहीं पाई गई।
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रखा गया था चार फीसदी की कमी का लक्ष्य

आयोग ने लाइन हानियों में चार फीसदी कमी का लक्ष्य रखा था लेकिन बमुश्किल 1.50 फीसदी की ही कमी हुई है, जबकि आयोग ने साफ कर दिया था कि अगर लाइन हानियों में कमी का लक्ष्य पूरा नहीं होता है तो अगले वर्ष रेग्युलेटरी सरचार्ज में 10 फीसदी की कमी स्वत: हो जाएगी।

इसके साथ ही बगैर कनेक्शन वाले लगभग सवा दो करोड़ घरों को कानूनन दायरे में लाने के लिए हर साल 36 लाख नए कनेक्शन जारी करने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने में भी बिजली कंपनियां नाकाम रही हैं।

आयोग ने कहा था कि नए कनेक्शन का लक्ष्य पूरा न होने पर कॉर्पोरेशन की ओर से दाखिल किए जाने वाले टैरिफ प्रस्ताव में 10 फीसदी की कटौती कर दी जाएगी। आयोग ने स्पष्ट कहा है कि मार्च 2015 के  बाद अनमीटर्ड श्रेणी को मान्यता नहीं दी जाएगी लेकिन यह संभव नहीं दिखाई दे रहा है।

आयोग के मुताबिक इस समय प्रदेश में आवासों की संख्या लगभग 3.29 करोड़ है जबकि बिजली के कनेक्शन लगभग 1.25 करोड़ ही हैं। लगभग दो करोड़ घरों में कनेक्शन हैं ही नहीं। इनका बोझ ईमानदार उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है। अगर ये कॉर्पोरेशन के लेजर पर आ जाएं तो शायद दरें बढ़ाने की जरूरत ही न पड़े। उल्टे दरें कम हो सकती हैं।

कार्पोंरेशन व बिजली कंपनियों से मांगी सूचना

आयोग के सूत्रों का कहना है कि चूंकि पिछली बार परफॉर्मेंस बेस टैरिफ ऑर्डर जारी किया गया था और इस बार भी इसी आधार पर दरों का निर्धारण किया जाना है, इसलिए कंपनियों के परफॉर्मेंस की गहन समीक्षा की जा रही है।

यही वजह है कि आयोग ने कॉर्पोरेशन की ओर से दाखिल  एआरआर व टैरिफ प्रस्ताव को अभी तक मंजूर नहीं किया है। उसने कॉर्पोरेशन व बिजली कंपनियों से कुछ सूचनाएं मांगी हैं।

इसके बाद ही प्रस्ताव मंजूर करने पर निर्णय किया जाएगा। सूचनाएं भेजने में बिजली कंपनियों की हीलाहवाली के चलते 1 अप्रैल तक दरों के निर्धारण की प्रक्रिया पूरी होने के आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं।

1 अप्रैल से कम हो जाएगा रेग्युलेटरी सरचार्ज
आगामी 1 अप्रैल से प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं पर सरचार्ज का बोझ कम हो जाएगा। मौजूदा समय में 2.84 फीसदी सरचार्ज वसूला जा रहा है।

आयोग ने अपने आदेश में यह प्रावधान किया है कि अगर बिजली कंपनियां लाइन हानियों में कमी का निर्धारित लक्ष्य पूरा करने में नाकाम रहती हैं तो 1 अप्रैल 2015 से सरचार्ज स्वत: घटकर 0.34 फीसदी रह जाएगा।
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दरों में कमी के लिए उपभोक्ता परिषद चलाएगी मुहिम

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद बिजली दरों में कमी के लिए होली के बाद अभियान छेड़ेगी। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि  कॉर्पोरेशन भले ही सुधार के बड़े-बड़े दावे करता हो पर उपभोक्ताओं को लाभ देने की बात आती है तो पीछे हट जाता है।

चूंकि आयोग ने परफॉर्मेंस बेस टैरिफ ऑर्डर तय करने की बात कही है, इसलिए इस बार कॉर्पोरेशन को झटका लगना तय है।

इसकी शुरुआत अप्रैल से सरचार्ज में 2.50 प्रतिशत कमी से होने की उम्मीद है।

वर्मा ने कहा कि बिजली कंपनियां परफॉर्मेंस के मानकों पर खरी नहीं उतर सकी हैं, इसलिए आयोग को अपने वादे के मुताबिक बिजली दरों में कमी करनी चाहिए।
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