लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में करीब 17 साल बाद पोस्ट डाॅक्टोरल (डी.लिट.) के दाखिले शुरू होने जा रहे हैं। विश्वविद्यालय में आखिरी बार वर्ष 2008 में पोस्ट डाॅक्टोरल के दाखिले शुरू हुए थे। इसका नया आर्डिनेंस तैयार हो चुका है। इसी महीने इसे विभिन्न शैक्षणिक समितियों के सामने रखा जाएगा।
लविवि में वर्ष 2008 में नए पीएचडी आर्डिनेंस बनाने के दौरान पोस्ट डॉक्टोरल रिसर्च के दाखिलों पर मौखिक रोक लगाई थी। एक बार इस पर रोक लगी तो दोबारा शुरू होने की नाैबत ही नहीं आई। इस साल लविवि प्रशासन ने पीएचडी आर्डिनेंस के साथ ही डी.लिट. का आर्डिनेंस तैयार किया है। इसके बाद इस साल पीएचडी के साथ ही डी.लिट. के दाखिलों की शुरुआत भी हो जाएगी।
विदेशों में है काफी महत्व
डी.लिट. की उपाधि इस समय विवि या किसी अन्य संस्थान में नियुक्ति के लिए अनिवार्य अर्हता नहीं है। शोध के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए शोधार्थी डी.लिट. करते हैं। विदेशी विश्वविद्यालयों में डी.लिट. का काफी महत्व है। विवि से डी.लिट. की उपाधि प्राप्त करने के बाद शोधार्थियों के पास विदेशी विश्वविद्यालयों में नियुक्ति और शोध संस्थानों से जुड़ने का अच्छा मौका होता है। इसलिए पीएचडी के बाद शोधार्थी पोस्ट डॉक्टोरल रिसर्च करना चाहते हैं। लविवि में दोबारा इसकी पढ़ाई शुरू होने पर शोधार्थियों के लिए नए रास्ते खुलेंगे।
शोधार्थी नहीं ले पाते पोस्ट डाॅक्टोरल फेलोशिप
शोध को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान और सामाजिक विज्ञान दोनों ही क्षेत्र में कई संस्थान पोस्ट डाॅक्टोरल फेलोशिप प्रदान करते हैं। पीएचडी के बाद काफी शोधार्थी और यहां तक लविवि के कई शिक्षक भी पोस्ट डाॅक्टोरल शोध करना चाहते हैं, लेकिन आर्डिनेंस न होने से इसकी शुरुआत नहीं हो पा रही है। अब नया आर्डिनेंस बनने जा रहा है, शोधार्थी और शिक्षक दोनों के लिए अच्छी खबर है।
कोट
विश्वविद्यालय में पोस्ट डाॅक्टोरल रिसर्च का नया आर्डिनेंस तैयार हो रहा है। सभी समितियों से पास होने के बाद इसे कार्य परिषद के सामने रखा जाएगा। पूरा प्रयास है कि इस साल यहां डी.लिट. के दाखिलों की शुरुआत हो जाएगी।
- प्रो. गीतांजलि मिश्रा, डीन एकेडमिक्स, लविवि