गोंडा। जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव होने के बाद अब ब्लॉक प्रमुख के पदों के चुनाव की तैयारियां रफ्तार पकड़ रही हैं। प्रमुख चुनाव को लेकर रूपईडीह के बीडीसी सदस्य की गिरफ्तारी मामले के बाद अब कई और ब्लॉकों में घमासान तेज हो गया है। पंडरीकृपाल ब्लॉक में बड़ी कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं, माना जा रहा है कि यहां एक पूर्व प्रमुख को घेरने की रणनीति तैयार हो रही है। उनके पूर्व के कार्यकाल की जांच का खाका तैयार हो रहा है। वहीं कई और ब्लॉकों में भी रिपोर्ट तैयार हो रही है। वहीं प्रशासन ने प्रधानों की चल रही जांच की रिपोर्ट विभागों से तलब किया है, जिससे कईयों के पसीने छूट रहे हैं।
ब्लॉक प्रमुख के 15 पदों पर चुनाव इसी माह होने हैं और एक दो दिन में तारीख तय होने का अनुमान लगाया जा रहा है। अध्यक्ष जिला पंचायत पर एक तरफा जीत से उत्साहित भाजपा सभी प्रमुख पदों जीत की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि एक ब्लाक आपसी समझौते में किसी दूसरे दल के पक्ष में जाने की सुगबुगाहट हो रही है। इसके अलावा सभी पदों पर भाजपा समर्थित ही प्रमुख चुनाव जाए, इसका खाका पार्टी ने खींच लिया है। अन्य दलों को कड़ा संदेश देने के लिए रूपईडीह के बीडीसी को शहर के एक स्कूल से निकाल कर घर भिजवाने का दांव, इसी कड़ी का परिणाम था। इसके बाद कुछ ब्लाकों में पार्टी के रणनीति को बिगाड़ने की कोशिश में लगे लोगों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी हो रही है। इसमें पंडरीकृपाल ब्लाक चर्चा में है और यहां बीते दो कार्यकाल में प्रमुख रहे एक पूर्व प्रमुख निशाने पर हैं। फिलहाल भाजपा में उनकी भी पैठ है लेकिन भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरने में भाजपा के उनके सपंर्क के लोग चुप्पी साध सकते हैं।
ऐसे में यहां भी देर सबेर समझौते की स्थिति बन सकती है। इसके अलावा अधिकतर ब्लाकों में भाजपा की रणनीति कारगर होते दिख रही है। परसपुर में समझौता न होने पर वहां पर भी जांच और कार्रवाई तेज हो सकती है। इसके साथ ही बभनजोत ब्लाक भी चर्चा में हैं, वहां पर मौजूदा गौरा विधायक अपने परिवार से किसी को प्रमुख बनाने की तैयारी मे हैं। माना जा रहा है कि उनके सामने पूर्व विधायक दिख रहे हैं, खैर पार्टी हर दांव पर विचार कर रही है। इस तरह अब जिले में प्रमुख पदों पर जीत हासिल करने के लिए दावेदार बड़े नेताओं के दरबार हाजिरी देने के लिए जुट रहे हैं और रणनीति तैयार हो रही है।
पहले से चर्चा में रहा ब्लॉक पंडरीकृपाल
जिले में पड़रीकृपाल ब्लाक पहले से ही चर्चा में रहा है। साल 2011 में तत्कालीन डीएम राम बहादुर ने ब्लाक को इंद्रापुर गांव में बने ब्लॉक आवास परिसर में शिफ्ट किया था। जिससे स्थानीय लोगों को एक ही स्थान सारी सुविधाएं मिल जाए। माना जा रहा है कि जहां ब्लाक स्थित हैं वहां आम लोगों का जाना दूभर रहता था। वहीं यह शहरी क्षेत्र में है और रेलवे लाइन होने के कारण आवागमन में दिक्कत होती थी। लेकिन जिलाधिकारी के स्थानांतरण के बाद साल 2012 में ही चोरी- चुपके फिर ब्लाक के कार्यालय शिफ्ट कर दिए और ब्लाक का आवासीय परिसर फिर से वीरान हो गया। वहां के अब आवास खंडहर में तब्दील हो गया है और कुछ आवासों का स्थानीय लोगों का कब्जा है।
मनरेगा घपले के लिए आया था ब्लाक चर्चा में
मनरेगा योजना के शुरुआती दौर साल 2008-09 से ही पंडरीकृपाल चर्चा में रहा है। यहां पर बड़े पैमाने पर घपले सामने आए और उनमे कार्रवाई भी हुई। बताया जा रहा है कि श्रम और सामग्री का अनुपात तोड़कर कई बार भुगतान का मामला चर्चा में आया और कार्रवाई भी है। बढ़ से घपलों को देखते हुए ही साल 2011 में तत्कालीन डीएम ने ब्लाक पर विशेेष निगरानी की थी और कार्यालय को आम लोगों के लिए सुलभ स्थान पर संचालित कराया था। इसके तो कई बार घपले का मामला सामने आता रहा है। अब एक बार फिर उस समय के मामलों को खोजा जा रहा है। जल्द ही बड़ी कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं।