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लखनऊ में प्रदूषण: अब अलग-अलग समय पर चलेंगी औद्योगिक इकाइयां, बदलेगा स्कूलों की छुट्टियों का भी समय

Sat, 09 Nov 2024 08:14 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला, सिटी रिपोर्टर, लखनऊ

सार

Pollution in Lucknow: लखनऊ में हवा का स्तर सुधारने के लिए तालकटोरा में अलग-अलग समय पर औद्योगिक इकाइयां चलाई जाएंगी। हालांकि इस फैसले से उद्यमी खफा हो गए हैं। 
 
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यूपी में प्रदूषण का स्तर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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 हवा की सेहत ठीक करने के लिए तालकटोरा क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयां अलग-अलग समय पर चलेंगी। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के खराब स्तर को देखते हुए जिलाधिकारी सूर्यपाल गंगवार ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में प्रदूषण के मुद्दे पर विभिन्न विभागों के साथ समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिया।

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जिलाधिकारी ने इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रतिनिधियों को निर्देशित किया कि अगले 15 दिनों के लिए औद्योगिक इकाइयां अलग-अलग समय पर संचालित की जाएं। अगर इससे वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार होता है, तो यह रोटेशन अगले तीन महीने के लिए बढ़ा दिया जाए। इसकी रिपोर्ट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजी जाएगी। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सर्दियों की शुरुआत से पहले वायु प्रदूषण और स्मॉग की समस्या को देखते हुए विभिन्न शहरी क्षेत्र के लिए कार्ययोजना तैयार की है। इसमें लखनऊ भी शामिल है। इसके आधार पर डीएम ने कुछ और अहम निर्देश दिए हैं।

ये निर्देश भी ...स्कूलों की छुट्टी अलग-अलग समय में
- कंस्ट्रक्शन वेस्ट मैटेरियल जमा न होने दें, इसे नगर निगम के सीएंडडी वेस्ट प्लांट पर पहुंचाया जाए।
- जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी क्षेत्र के सभी स्कूलों की छुट्टियां एक ही समय पर न करके अलग-अलग समय पर की जाए।
- जिला कृषि अधिकारी किसानों को पराली न जलाए जाने के लिए जागरूक करें और इसकी नियमित निगरानी भी करें।
- नगर निगम कच्ची सड़कों पर फुटपाथ बनाए।
- नगर निगम वायु प्रदूषण वाले हॉटस्पॉट चिह्नित कर बराबर जल छिड़काव व एंटीस्मॉग गन का प्रयोग करे।
- अतिरिक्त कूड़ा रोज उठाया जाए, कूड़ा जलाने की स्थिति न बने।
- उत्तरदायी विभाग उपलब्ध सभी उपकरणों का टाइम टेबल के आधार पर कार्मिकों की ड्यूटी लगाकर 24 घंटे वायु प्रदूषण के नियंत्रण के लिए लिस्टिंग करते हुए अलग-अलग जगहों पर प्रयोग किया जाए।
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- लगातार वाटर स्प्रिंकलिंग, एंटी स्मॉग गन तथा मशीनों से सफाई कराई जाए।

डीएम के निर्देश से उद्यमी खफा

वायु प्रदूषण का खतरा (AI) - फोटो : Freepik.com
तालकटोरा क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयों को अलग-अलग समय पर चलाने के डीएम सूर्यपाल गंगवार के निर्देश पर उद्यमियों ने सवाल उठाए हैं। उद्यमियों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अकेले औद्योगिक इकाइयां ही क्या शहर में प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं? इकाइयों पर ऐसे फैसले थोपने की क्यों कोशिश हो रही है।

हवा में घुलते जहर को कम करने के लिए जिलाधिकारी ने तालकटोरा औद्योगिक क्षेत्र में अगले 15 दिन तक अलग-अलग समय पर इकाइयों को चलाने के निर्देश दिए हैं। यही नहीं, 15 दिन के ट्रायल के बाद सुधार मिले तो प्रक्रिया को तीन महीने तक चलाने को कहा है। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन लखनऊ चैप्टर व तालकटोरा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने इन निर्देशों को अव्यावहारिक बताया है।

बैठक में आईआईए के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल रहे कार्यकारी निदेशक श्री प्रकाश आचार्य ने बताया कि डीएम ने सभी विभागों से तालमेल बनाकर निर्देशों को लागू कराने को कहा है। आचार्य का कहना है कि वह औद्योगिक इकाइयों को शिड्यूलिंग के लिए कहेंगे।

उद्यमियों के सवाल और दलीलें
शहर में प्रदूषण दिवाली के बाद बढ़ा है। फैक्ट्रियां तो पहले से भी चल रही थीं। दिवाली की छुट्टी में इकाइयां बंद थीं, तो फिर वायु प्रदूषण बढ़ाने में फैक्ट्रियां ही अकेले कैसे जिम्मेदार?
उद्यमियों का तर्क है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वायु गुणवत्ता सूचकांक मापने के लिए जो यंत्र लगाया है वह पांच किमी की परिधि तक का हाल बताता है। चारबाग स्टेशन, आलमबाग, ऐशबाग, चौक जैसे क्षेत्र इस परिधि में ही आ जाते हैं। इन इलाकों में वाहनों का काफी दबाव रहता है और जाम भी लगता है। सबसे ज्यादा प्रदूषण जाम में लंबे समय तक फंसे वाहन फैलाते हैं।
तालकटोरा औद्योगिक क्षेत्र की बदहाल सड़कों से दिन भर धूल उड़ती है। वर्षों से नाला और सड़क बन ही रही हैं। इस धूल उड़ने के लिए इंडस्ट्री कैसे जिम्मेदार है?
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इंडस्ट्री से ज्यादा सड़कों से उड़ती है धूल

मैंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पत्र लिखकर बताया है कि तालकटोरा में लगा यंत्र 5 किमी की परिधि में आने वाले इलाकों को कवर करता है। यानी पूरे क्षेत्र का प्रदूषण तालकटोरा में लगा मापक यंत्र बताता है। वर्षों से सड़कों व नालों का निर्माण चल रहा है, इससे धूल उड़ती है। ऐसे में तालकटोरा की औद्योगिक इकाइयों को क्यों जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। ये कहां का न्याय है?-विकास खन्ना, चेयरमैन, आईआईए, लखनऊ चैप्टर

चलती इकाइयों से छेड़छाड़ अव्यावहारिक
इंडस्ट्री को अलग-अलग समय पर चलाने की बात पूरी तरह से अव्यावहारिक है। दिन में जो श्रमिक काम के लिए आते हैं, वे रात में क्यों आएंगे? 1000 रुपये लेने वाले 1400 रुपये लेंगे। श्रमिक रात में काम करेंगे तो उत्पादन भी घटेगा। इंडस्ट्री तो दिवाली से पहले भी चल रही थी। चलते सिस्टम से छेड़छाड़ के बजाय प्रशासन को वाहनों पर अंकुश लगाने समेत अन्य उपायों पर गौर करना चाहिए।- संदीप सक्सेना, चेयरमैन, आईटी एंड एग्रीकल्चर सेल, एसोचैम
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