लखनऊ। वाहनों को प्रदूषण प्रमाणपत्र देने वाले केंद्रों की लापरवाही पर परिवहन विभाग ने सख्ती दिखाई है। प्रदूषण केंद्र बगैर वाहनों के आए प्रमाणपत्र जारी कर रहे थे। छह केंद्रों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि एक पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश के कई जिलों में प्रदूषण का स्तर काफी ज्यादा है। ऐसे में उन जिलों में बाहर से आने वाली 10 साल से ऊपर डीजल गाड़ियों और 15 साल से अधिक की पेट्रोल गाड़ियों का पुनः पंजीकरण बंद कर दिया गया था। इसके बाद ऐसे जिलों में संचालित हो रहे वाहनों के प्रदूषण प्रमाणपत्र को लेकर भी परिवहन विभाग की तरफ से सख्त आदेश जारी किए गए। कहा गया कि केंद्रों पर वाहन की जांच के बाद ही प्रमाणपत्र जारी किए जाएं। लेकिन सेंटर संचालक वाहन को सेंटर पर लाए बिना ही वाहन स्वामियों को पॉल्यूशन सर्टिफिकेट जारी कर रहे हैं। फोटो देखकर ही सर्टिफिकेट दे रहे हैं, ऐसी शिकायत मिलने के बाद विभाग ने प्रदेश के छह प्रदूषण केंद्रों को सस्पेंड कर दिया है। इनमें से एक पर एफआईआर करने के भी निर्देश दिए गए हैं। बरेली के यात्री कर अधिकारी ने परिवहन आयुक्त कार्यालय को शिकायतें भेजी। छह प्रदूषण जांच केंद्रों में से चार प्रदूषण जांच केंद्र बनारस के, एक बरेली का और एक बदायूं का है। इनमें से पांच सेंटरों पर बिना वाहन आए फोटो के आधार पर ही सर्टिफिकेट जारी किया जा रहा था। इन सभी के प्राधिकार पत्र सस्पेंड करने की कार्रवाई की गई है। लखनऊ परिक्षेत्र के डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर राधेश्याम का कहना है कि प्रदूषण जांच केंद्रों की इस अनियमितता पर कार्रवाई की गई है। सभी एआरटीओ को आईडी पासवर्ड जारी किया गया है, अब वे प्रदूषण जांच केंद्रों का बारीकी से निरीक्षण करेंगे, उन सभी की जांच करेंगे और अनियमितता सामने आने पर तत्काल ऐसे प्रदूषण जांच केंद्रों पर कार्रवाई करेंगे।