भरवारा एसटीपी से गोमती में जा रहा गंदा पानी।
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गोमती को स्वच्छ बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर बनाया भरवारा स्थित 345 एमएलडी के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) ही प्रदूषण बढ़ा रहा है।
एसटीपी से छोड़े गए शोधित पानी की हकीकत डिस्चार्ज प्वॉइंट से आगे नदी में एक किमी. लंबाई तक फैला सफेद झाग बताता है।
नदी में एसटीपी के डिस्चार्ज प्वॉइंट सहित गोमती की सैटेलाइट इमेज तक में यह झाग फैला हुआ दिख रहा है। यह तब है जबकि, एसटीपी में सीवरेज के शोधन का काम कर रही निजी कंपनी सुएज इंडिया लगातार मानकों के मुताबिक ही शोधित पानी छोड़ने का दावा कर रही है।
दावा : मानक के मुताबिक ही छोड़ते हैं पानी
सुएज इंडिया के हेड राजेश भटपाल का कहना है कि एसटीपी से सीवरेज शोधन के बाद डिस्चार्ज की जांच की जाती है। बीओडी व अन्य फैक्टर के मानक के मुताबिक होने पर ही डिस्चार्ज नदी में छोड़ा जाता है जो झाग पैदा हो रहा है। वह नदी में पहले से मौजूद गंदे पानी में डिस्चार्ज के मिलने से पैदा हो रहा होगा।
हकीकत : डिस्चार्ज में साबुन होने से बनता है झाग
बीबीएयू के पर्यावरण विज्ञान के प्रोफेसर वेंकटेश दत्ता का कहना है कि सफेद झाग होने की एकमात्र वजह डिस्चार्ज में साबुन की मौजूदगी है। शोधित पानी के गिरने से झाग पैदा होने से संभावना यही है कि शोधित पानी में साबुन (डिटरजेंट) है। एसटीपी में डिटरजेंट का शोधन नहीं किया जा रहा होगा। जिम्मेदारों को समझना चाहिए कि नदी में डिटरजेंट की मौजूदगी से जलीय जीवों की जिंदगी प्रभावित होती है। ऐसे पानी में तो मछलियों तक का पनपना मुश्किल हो जाएगा। एसटीपी में इसके शोधन को सुनिश्चित करना ही होगा।