सूबे में एक रजिस्ट्रार साहब की ‘काबिलियत’ चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि दलबदलू नेताओं की तरह वह हर सरकार को कैसे साध लेते हैं।
वह भी तब जबकि शुरू से ही निशाने पर रहते आए हों। बताते हैं कि जब मौजूदा सरकार आई थी तो उसके नेता पिछली सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते-लगाते यहां तक कह जाते थे कि इन्होंने तो शिक्षा जैसी पवित्र संस्थाओं को भी नहीं बख्शा।
कहा जाता है कि वह पिछली सरकार में नौकरशाही के शीर्ष पर काबिज शख्स की नाक के बाल हुआ करते थे।
नई सरकार जिस तरह से तकनीकी रजिस्ट्रार पर हमले बोल रही थी, उससे लोग समझ रहे थे कि रजिस्ट्रार साहब की तकनीकी सर्वोच्चता का वक्त पूरा हुआ लगता है।
मगर इस सरकार के भी पौने दो साल पूरे हो गए, रजिस्ट्रार के सामने बड़े-बड़े पानी भर रहे हैं। इससे भी बड़ी बात ये कि रजिस्ट्रार को पानी पी-पीकर निशाना बनाने वाले अब उनकी पैरवी करते नजर आ रहे हैं।