लोक निर्माण राज्यमंत्री सुरेंद्र पटेल ने वाराणसी में कंबल वितरण समारोह में एक युवक को थप्पड़ जड़ दिया। समारोह में कई लोगों से धक्का-मुक्की भी हुई।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भले ही प्रदेश की सियासत की रीति-नीति बदलने का संकेत दे रहे हों लेकिन उनके मंत्री व नेताओं के कड़वे और अहंकारी बोल जारी हैं।
अफसरों को धमकाने से लेकर विरोधियों को सबक सिखाने तक के बयानों की लंबी फेहरिस्त है। सपा ही क्यों, दूसरे दलों के नेता भी बड़बोलेपन और गरिमा के प्रतिकूल बयान देने में पीछे नहीं हैं।
सार्वजनिक जीवन में शुचिता के पक्षधर लोग भाषा पर संयम खोने के रुझान को लोकतंत्र के लिए खतरनाक मानते हैं।
सूबे में सियासत का ऐसा दौर शुरू हो गया है कि राजनीतिक शिष्टाचार और पद की गरिमा गिरती जा रही है। सत्तापक्ष के नेताओं से ज्यादा धैर्य और मर्यादा की उम्मीद की जाती है लेकिन वे भी अपने बयानों और आचरण से चर्चा में आ रहे हैं।
ताजा मामला राज्यमंत्री सुरेंद्र पटेल और कैबिनेट मंत्री शिव कुमार बेरिया से जुड़ा है। पटेल पर वाराणसी में कंबल वितरण समारोह में लोगों के साथ बदसुलूकी करने का आरोप लगा।
पटेल न केवल राज्यमंत्री हैं वरन वाराणसी संसदीय सीट से सपा के प्रत्याशी भी हैं। हालांकि उन्होंने सफाई दी है कि थप्पड़ मारने का आरोप बेबुनियाद व झूठा और उनके खिलाफ साजिश है।
जिस मासूम को थप्पड़ मारने की बात कही जा रही है वह 26 साल का है और उनके घर का लड़का है।
वहीं, कैबिनेट मंत्री शिव कुमार बेरिया ने तो अपने जनता दरबार में लोगों को यह कहते हुए धमकी दी कि यदि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को लोकसभा चुनाव में वोट नहीं मिला तो उनके इलाके का विकास नहीं होगा।
आपके पोलिंग स्टेशन पर वह हार गईं और हम विकास के लिए पैसा मांगने जाएंगे तो वे पन्ना पलटकर कहेंगे कि आपके पोलिंग स्टेशन पर तो हारे हैं, पैसा कैसे मिलेगा। फिर चिल्लाओगे कि विकास नहीं हो रहा।
पैसा हमें तो देना नहीं, मुख्यमंत्री को देना है और उनकी पत्नी चुनाव लड़ रही हैं। इससे पहले भी अफसरों को धमकाने वाले बयान देकर कई मंत्री चर्चा में आ चुके हैं।
मंत्री ही क्यों, बड़बोलेपन में नेता भी पीछे नहीं हैं। पिछले दिनों सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा कि मोदी तो राजनाथ को चपरासी बनाए घूम रहे हैं।
इसके जवाब में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा, ‘मुलायम सिंह, शिवपाल यादव, रामगोपाल और अखिलेश यादव आजम के चपरासी बने घूम रहे हैं।’
मोदी पर टिप्पणी को लेकर भी नेता राजनीतिक शिष्टाचार भूल गए। सपा महासचिव नरेश अग्रवाल के दो बयान बड़े चर्चा में रहे। एक में उन्होंने कहा कि चाय बेचने वाला देश नहीं चला सकता।
दूसरा बयान मोदी के अविवाहित होने पर था। उन्होंने कहा, बीजेपी में लोग शादी करते नहीं, वे क्या जानें परिवार का मजा। हमारे गांवों में कहावत है, ...के पास आशीर्वाद मांगने जाओ तो वह कहती है, हमारे जैसी हो जाओ।’
केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने मोदी पर टिप्पणी की, ‘वह सड़क छाप नेताओं की बातों का न तो संज्ञान लेते हैं और न जवाब देते हैं।’
एक वरिष्ठ सपा नेता ने कहा कि मुजफ्फरनगर दंगा गुजरात से आए गुंडों ने कराया। ये गुंडे अमित शाह ने भेजे थे। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने चुनावी सभा में कहा, मुजफ्फरनगर दंगा भाजपा ने करवाया।
मुजफ्फरनगर के कुछ युवक आईएसआई के संपर्क में हैं। मोदी ने कांग्रेस के खूनी पंजे का जिक्र किया तो राहुल ने भाजपा नेताओं पर चोरी और लूट करने का आरोप लगा दिया।
इन मामलों की शिकायत निर्वाचन आयोग तक पहुंची। वहीं कांग्रेस नेता व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा लगातार मुलायम को मुसोलिनी और मोदी को हिटलर बता रहे हैं। मुलायम को तो वे गुंडा तक कह चुके हैं।