पार्टी को बढ़त क्या मिली, जिसे देखो वह बढ़त का श्रेय लेने में जुटा है। कोई कह रहा है कि उसने कार्यालय का गेट बदलवा दिया, इससे लाभ हुआ।
कोई कसर न रह जाए सो यहां तक कहता है कि कह तो मैं बहुत पहले से रहा था लेकिन कोई सुनता ही नहीं था। काश! पहले सुन लेते तो यूपी में भी हम सत्ता में आ जाते।
कोई कार्यालय में बैठकर लोगों को यह समझाने में जुटा है कि अध्यक्ष के बैठने का स्थान बदलवाने का सुझाव देते-देते थक गया। पर, कोई सुनता ही नहीं था।
जब अमुक ने यह बात कही तो उस पर अमल हो गया। उसका लाभ भी मिल रहा है। पार्टी का हाल ही ऐसा है कि घर का जोगी जोगड़ा, आन गांव का सिद्ध।
यह सुनते-सुनते आखिर एक कार्यकर्ता से नहीं रहा गया। बोला- कहता तो मैं भी हूं कि पार्टी के बचे-खुचे पुराने नेताओं को भी हटा दो तो यूपी में भाजपा और सुधर जाए।
फिर क्या था, सभी उस कार्यकर्ता के ऊपर गरम। बेचारा कार्यकर्ता! मासूमियत से बोला- आप ही लोग तो कह रहे हैं कि बदलाव अच्छा है।
सो मैने सोचा कि यहां के कुछ और लोग बदल जाएं तो शायद यहां भी पार्टी की तस्वीर बदल जाए।