जिस लखनऊ सीट से अटल बिहारी वाजपेयी पांच बार सांसद रहे, उससे नरेंद्र मोदी की दूरी चर्चा में रही।
राजधानी की अतिमहत्वपूर्ण सीट होने के बावजूद यहां मोदी की चुनावी सभा नहीं हुई।
कुछ लोगों ने मतलब यह निकाला कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद यहां चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए उन्हें मोदी के प्रचार की जरूरत नहीं थी।
यूं भी पार्टी के सेकंड लाइन के कई लीडर और तीन मुख्यमंत्री यहां प्रचार के लिए आ चुके हैं।
कुछ लोगों का कहना है कि राजनाथ सिंह ने गाजियाबाद छोड़कर इसीलिए लखनऊ से चुनाव लड़ने का फैसला किया कि यह उनके लिए ज्यादा सुरक्षित सीट हैं।
मोदी की देश भर में डिमांड है, इसलिए उन्होंने ‘सेफ’ सीट पर सभा का कार्यक्रम न तय करके टाइम बचाने की कोशिश की।
वजह जो भी हों, अटकलें लग रही हैं कि कहीं प्रधानमंत्री पद के अघोषित दावेदार होने के कारण तो राजनाथ सिंह की सीट से किनाराकसी नहीं हुई।