बड़बोलापन अक्सर मुसीबत बन जाता है। ऐसा ही बसपा के एक नेताजी के साथ हुआ। बेचारे भाजपा व कांग्रेस से होड़ लेने के चक्कर में उन्होंने ध्यान ही नहीं रखा कि यह दांव उन्हें उल्टा पड़ सकता है।
उठा दी कैग रिपोर्ट के निष्कर्षों पर विधानसभा में चर्चा कराने की मांग। नेताजी के तेवर देख भाजपाइयों ने उनका उत्साह और बढ़ाया। नेताजी और आगे बढ़ गए।
इसी बीच, उनके कान में एक दूसरा नेता फुसफुसाया कि कैग रिपोर्ट में स्मारकों के घोटालों का भी उल्लेख है। बेचारे नेताजी! काटो तो खून नहीं। चक्कर आने लगा। लगा कि सब कुछ गया। खैर, जैसे-तैसे खुद को संभाला।
अध्यक्ष से कहा कि उनकी सूचना को संज्ञान में न लें। वह चर्चा नहीं कराना चाहते। अध्यक्षजी ने भी कृपा की और उनकी सूचना वापस कर दी। पर, नेताजी का हाल बुरा है। उधर, उन्हें देखते ही लोग चुटकी लेते हैं, तोल मोल के बोल।