सूबे के पूर्व प्रशासनिक प्रमुख आजकल खासे परेशान हैं। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि दो साल पहले जिस सरकार ने उन्हें सिर-आंखों पर बिठाया था वही उन्हें इस तरह दोराहे पर खड़ा कर देगी।
हाल कुछ ऐसा ही है। हटाए जाने के बाद कई बार दिल्ली के चक्कर काटे। भाजपा के दिग्गज नेताओं के दर पर दस्तक दी कि दिल्ली में ‘एडजस्ट’ करा दो लेकिन नेताओं ने यह कहते हुए हाथ खड़े कर दिए कि जब तक पीएम नहीं चाहेंगे कुछ नहीं होगा।
पीएमओ का दरवाजा खटखटाया लेकिन वहां से भी मायूसी हाथ लगी। थक-हारकर फिर नेताजी की ही शरण में पहुंचे।
गुजारिश की कि यूपी में आप लाए थे तो अब दिल्ली में भी व्यवस्था बनवा दें ताकि बची-खुची नौकरी इज्जत के साथ पूरी कर लें। लोग चुटकी ले रहे हैं कि जिसने दर्द दिया उसी से दवा मांग रहे हैं।