लोकसभा चुनाव जीतकर अपने घर लखनऊ लौटे एक राजनेता को बधाई देने के लिए सूबे के एक आला हाकिम भी चुपचाप उनके यहां पहुंच गए।
किसी को इसकी भनक न लगे सो अपनी पर्सनल गाड़ी गए। यह भी बंदोबस्त कर लिया कि मौके पर कोई भेदिया न हो। पर, खबर सूबे के सत्ता सदन तक पहुंच ही गई।
सरकार ने भी सबक सिखाने की ठान ली। जैसे ये अफसर नेता से मुलाकात की भनक किसी को नहीं लगने देना चाहते थे, वैसे ही इनकी बेदखली की योजना बनी।
पता तब चला जब मलाईदार जगह से हट गए। हटाए गए ये हाकिमान यह जानने की कोशिश में जुटे हुए हैं कि आखिर में भेद किसने खोला और लोगों में यह जानने की उत्सुकता है कि हटाए गए अफसरों में पाला बदल के जुगाड़ लगाने वाले कौन-कौन थे?
वैसे जो सज्जन दिल्ली जाकर लौटे थे, वे अब तक की सबसे रुतबेदार कुर्सी हासिल करने में कामयाब रहे हैं।