पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अक्सर कहते थे, ‘दोस्त बदल सकते हैं लेकिन पड़ोसी नहीं।’ इसलिए पड़ोसियों से प्रेम रखना चाहिए।
सो राजनाथ सिंह अगर यह कर रहे हैं तो इसमें बुराई क्या है। वैसे भी अब वे अधिकृत तौर पर अटल के उत्तराधिकारी बन चुके हैं।
शायद यही वजह है कि जब उनकी पूरी पार्टी, सपा सरकार के खिलाफ आग उगल रही है, तो भी वे चुप हैं।
खबरचियों ने कई ऐसे सवाल पूछे कि सूबे की सरकार के खिलाफ कुछ निकल आए, पर वे चुप ही रहे। लोग भले ही कुछ कहें, लेकिन लगता यही है कि कालिदास मार्ग का धर्म है।