लालबत्ती क्या छिनी, दर्जाधारी मंत्री रह चुके कई नेता बेचैन हैं। परेशानी सिर्फ स्टेट्स छिनने की नहीं है।
यह भी नहीं कि दूसरे दर्जाधारी अपने पदों पर क्यों बने हुए हैं, बल्कि ज्यादा दिक्कत इस बात की है कि ‘नेताजी’ लिफ्ट नहीं दे रहे। उनके सामने कैसे अपना रोना रोएं, कैसे वफादारी साबित करें।
चौधरी चरण सिंह जयंती का मौका देखकर कई ‘परेशान’ नेता पार्टी मुख्यालय पहुंच गए। ‘नेताजी’ के संबोधन के बाद उन्होंने अपनी बात रखनी चाही, मिलने के लिए वक्त की गुहार लगाई।
राजनीति में पांच दशकों का अनुभव रखने वाले ‘नेताजी’ लिफाफा देखते ही मजबून भांप गये। तपाक से कहा, तीन दिन किसी से नहीं मिलूंगा, बहुत व्यस्त हूं।
एक पूर्व दर्जाधारी मंत्री सपा दफ्तर के बाहर निकले तो बोल पड़े। किसे बताएं अपनी पीड़ा, लालबत्ती मिलने के बाद से पार्टी के काम में जुटा रहा, पता नहीं कैसे 36 लोगों में उनका नाम आ गया।
हालांकि उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी है, बस अच्छे दिनों के इंतजार में हैं।