प्रदेश में लोकसभा चुनाव से पहले सरकार ने अपनी पसंद के तमाम अफसरों को कलेक्टर व कप्तान बनाकर जिलों में भेजा था।
ऐसे अफसरों ने स्वामिभक्ति दिखाते हुए काम भी शुरू कर दिया। जैसी कि उम्मीद थी, शिकायत हुई और आयोग ने सरकार के चहेते अफसरों को हटाकर दूसरों को चुनाव कराने भेज दिया।
गौर करने वाली बात यह है कि इनमें से ज्यादातर वही अफसर थे जिन्हें सरकार ने मनमाफिक काम न करने पर महत्वहीन विभागों में तैनात कर रखा था।
इन अफसरों ने शांतिपूर्ण और साफ-सुथरा चुनाव कराने की उपलब्धि हासिल की। आठ जिलों में कलेक्टर रहे एक रिटायर्ड आईएएस कहते हैं कि यह सरकार अब भी अपनी हार से सबक लेने को तैयार नहीं है।
जिन अफसरों ने शांतिपूर्ण चुनाव कराया...जिनसे जनता ने चुनाव के दौरान सुकून महसूस किया, उन्हें हटाने और जिन पर सरकार के एजेंट होने का ठप्पा था, उन्हें फिर जिलों में भेजने की तैयारी है।
इससे साफ है कि सरकार को ऐसे अफसर पंसद नहीं हैं जो उसकी जी हुजूरी न करते हों।