डींगे हाकने वाले लोगों की इस चुनाव में कलई खुल गई। एक राष्ट्रीय पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष तो ऐसे विलुप्त हो गए हैं कि उनका कहीं पता ही नहीं चल रहा है।
वे अब अपने कार्यकर्ताओं तक का सामना नहीं कर पा रहे हैं। बेचारे मिलें भी तो किस मुंह से...। यूं तो इस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बड़े ही निर्मल हैं।
पूरा दम अपनी ही सीट पर लगा दिया। यह अलग बात है कि वे अपनी जमानत तक न बचा पाए...। अब वे पिछले दिनों लखनऊ आए।
कार्यकर्ताओं को बड़ी उम्मीद थी कि पार्टी दफ्तर भी आएंगे। कुछ दिलासा ही दे जाएंगे...। आगे क्या करना है इस पर ही कुछ मार्गदर्शन मिल जाएगा...।
लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। वे लखनऊ तो आए लेकिन पार्टी ऑफिस नहीं गए। अब उनके कार्यकर्ता अपने नेता की इस बेरुखी से खासे परेशान हैं...।