कई पूर्व मंत्रियों को पसीने छूट रहे हैं। वजह यह है कि पिछली सरकार के कई मंत्री विभिन्न मामलों की जांच में फंसे हुए हैं।
सरकार ऊपरी तौर पर उनके खिलाफ जांच बैठा कर अपने को निष्पक्ष बताने की कोशिश करती रही और अंदर ही अंदर सियासी सेटिंग के चलते ऐसे मामलों की जांच को ठंडे बस्ते में रखने के निर्देश दिए जाते रहे।
लेकिन अब जब कि सारे सियासी समीकरण धाराशायी हो गए हैं तो यह माना जा रहा है कि सत्तारूढ़ दल अब अपनी निष्पक्षता साबित करने के लिए ऐसे मामलों की जांच में तेजी लाएगी और सरकार अब नतीजों के जरिए अपनी कार्य प्रणाली को साबित करेगी।
असल में चुनाव के नतीजों से सामने आ चुका है कि सत्तारूढ़ दल का जमीनी समर्थन किसी हद तक खिसक गया है।
ऐसे में अब सरकार खुद की छवि को साफ-सुथरे तरीके से पेश करने की पुरजोर कोशिश करेगी। सरकार की इस मंशा को लेकर उठ रही चर्चा से जांच में आकंठ फंसे कई पूर्व मंत्रियों को पसीने छूटने लगे हैं।