नाइट ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मी अलर्टनेस खो रहे हैं। 86 प्रतिशत पुलिस
वालों को दिन की ड्यूटी ज्यादा भाती है। लखनऊ विश्वविद्यालय की एक पीएचडी
छात्रा के क्रोनोटाइप रिसर्च में यह तथ्य सामने आए हैं।
पीएचडी
छात्रा ने वीकली ऑफ पाने वाले 57 पुलिसकर्मियों से 19 तरह के सवाल पूछे।
स्टडी में सामने आया कि लंबी ड्यूटी पुलिसकर्मियों को बीमार बना रही है।
छात्रा ने अपनी स्टडी की रिपोर्ट डीआईजी नवनीत सिकेरा को सौंप दी है।
डीआईजी
नवनीत सिकेरा ने एक जून से गोमतीनगर थाने में पुलिसकर्मियों को वीकली ऑफ
देने की व्यवस्था प्रयोग के तौर पर शुरू की थी। उसके बाद ही लविवि के जंतु
विज्ञान विभाग के क्रोनोबायोलॉजी से पीएचडी कर रही अर्जिता यादव ने इन
पुलिसकर्मियों पर स्टडी शुरू की।
पूछे गए 19 सवाल
करीब एक माह की स्टडी के दौरान अर्जिता ने
57 पुलिसकर्मियों को एमईक्यू (मॉर्निंगनेस ईवनिंगनेस क्वेश्चनायर) और
एमसीटीक्यू (म्यूनिक क्रोनो टाइप क्वेश्चनायर) के तहत 19 सवाल किए।
पुलिसकर्मियों के जवाबों से जो परिणाम सामने आए वह चौंकाने वाले थे। 86
प्रतिशत पुलिसकर्मी एम टाइप (मॉर्निंग टाइप) निकले।
क्या बोले डीआईजी साहब
उन्होंने
बताया कि वे दिन की ड्यूटी में ज्यादा बेहतर महसूस करते हैं जबकि 14
प्रतिशत पुलिसकर्मी इंटरमीडिएट टाइप निकले। उन्होंने एम और ई-टाइप के बीच
के समय को बेहतर माना। एक भी पुलिसकर्मी ई-टाइप (ईवनिंग टाइप) नहीं निकला।
डीआईजी सिकेरा ने बताया कि वीमेन पावर लाइन की कर्मचारियों के साथ अन्य
पुलिसकर्मियों की भी स्टडी कराने का विचार है।
शोध
छात्रा अर्जिता का कहना है कि पुलिसकर्मियों की डाइट, अलर्टनेस को भी
सवालों के जरिए परखा गया। उनसे पूछा गया कि जब वह फ्री होते हैं तो किस समय
सोना पसंद करते हैं? पुलिसकर्मियों के ब्लडप्रेशर और हार्मोन का विश्लेषण
भी किया गया।
नींद न लेने से आ रही सुस्ती
स्टडी में यह सामने आया है कि लंबी ड्यूटी पुलिसकर्मियों को
बीमार बना रही है। स्टडी में पुलिसकर्मियों की स्कोरिंग और जवाबों में भी
अंतर पाया गया। इससे लगता है कि उनकी अलर्टनेस कमजोर हो रही है। नींद पूरी न होने की वजह से उनके साथ हादसा होने का भी खतरा रहता है।