लखनऊ। इंदिरा नगर-ए ब्लॉक में दिवंगत मेजर विपिन चंद्र भट्ट के मकान पर फर्जी दस्तावेज के आधार पर कब्जा करने के मामले में पुलिस की जांच तेज हो गई है। इस मामले में पांच अन्य लोगों के नाम भी जांच के दायरे में आ गए हैं।
इनकी भूमिका की गहन पड़ताल की जा रही है। साथ ही, मकान के म्यूटेशन (उत्तराधिकार) संबंधी कागजात और वसीयत के दस्तावेज की भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
गाजीपुर के एसीपी ए. विक्रम सिंह ने बताया कि अब तक गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी बलवंत कुमार यादव (निवासी सय्यद राजा, चंदौली) और मनोज यादव (दाउदपुर) के अलावा, कई अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता की जांच की जा रही है।
इस धोखाधड़ी में एक प्रॉपर्टी डीलर और चार अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। विवेचना जारी है और जांच के दौरान किसी भी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसे भी आरोपी बनाकर कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी कर्मचारियों पर भी शक
पुलिस की जांच सिर्फ जालसाजों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मकान के म्यूटेशन की प्रक्रिया में शामिल आवास विकास विभाग के कर्मचारियों और चंदौली रजिस्ट्रार कार्यालय के उन सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिन्होंने वसीयत से संबंधित दस्तावेजों को तैयार करने या सत्यापित करने में अपनी सेवाएं दीं। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या इन सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा हुआ है। पुलिस के सूत्र बताते हैं कि सोमवार पुलिस की एक टीम चंदाैली स्थित रजिस्ट्रार दफ्तर जांच के लिए जा सकती है। इस मामले में लापरवाही के आरोप में निलंबित किए गए सर्वोदयनगर चौकी इंचार्ज सौरभ सलोनिया के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
यह है मामला
मेजर विपिन का 30 वर्ष पहले निधन हो गया था। उनके एक बेटे व एक बेटी की भी मृत्यु हो चुकी है। दूसरी बेटी अंजना ही परिवार में बची हैं। वह गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं। पिछले आठ वर्षों से वह निर्वाण रिहैब सेंटर में रहती हैं। चंदौली निवासी बलवंत यादव व मनोज कुमार यादव ने उनके मकान पर कब्जा कर लिया है। अंजना ने सीएम योगी से मिलकर मामले की शिकायत की थी। इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज करते हुए आरोपी बलवंत और मनोज को गिरफ्तार किया था।