लखनऊ। एसजीपीजीआई में हुए लाखों के दवा घोटाले में परतें उधड़ने लगी हैं। ऐसे में संस्थान प्रशासन ने दोबारा घटना न होने के लिए नए प्रयास किए हैं। हालांकि, जांच में शामिल लोगों का नाम उजागर करने में पीछे हटता नजर आ रहा है।
एसजीपीजीआई में पीडी फंड से करीब 55 लाख का दवा घोटाला हुआ है। मरीज के खाते से कर्मचारियों ने दवाएं निकाल लीं। मरीज जब अस्पताल पहुंचा तो खुलासा हुआ। ये दवाएं डॉक्टरों के फर्जी हस्ताक्षर से निकाली गईं। पूछताछ में सामने आया कि घटनाक्रम का मास्टर माइंड यहां के अधिकारी के निजी सचिव का रिश्तेदार है। फिलहाल शक के आधार पर नियमित कर्मचारियों को इधर-उधर कर दिया गया है। वहीं, 18 संविदाकर्मियों को नौकरी से हटा दिया गया है। इसमें से आठ के खिलाफ एसजीपीजीआई ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। अन्य 10 पर शक जताया है, लेकिन अभी तक पुलिस को लिखित सूची नहीं दी है। मामले की जांच कर रहे इंस्पेक्टर नरेेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि एसजीपीजीआई प्रशासन से साक्ष्य मांगे गए हैं। इसी तरह 10 अतिरिक्त नामों की सूची भी मांगी गई, लेकिन अभी तक दस्तावेज मुहैया नहीं कराए गए हैं। ऐसा होते ही मामले की जांच कर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।