लखनऊ। अलीगंज थाने के गल्ला मंडी चौकी प्रभारी रहते दो बेगुनाहों को जेल भेजने वाला दरोगा नेपाल सिंह कई कारनामे कर चुका है। आरोपी दरोगा ने एक व्यक्ति के पास से 900 रुपये बरामद कर सात थानाक्षेत्रों की नौ चोरियाें का खुलासा किया था। इसमें चोरी के आरोपी की जमानत की सुनवाई के दौरान एडीजे ने सवाल खड़े किए थे कि आखिर किस तरह से पुलिस ने अपनी फर्द में 9 चोरियों की बरामदगी दिखाई है। इसके लिए दो थानों के प्रभारी निरीक्षकों को तलब भी किया था।
चिनहट थाने में कस्बा चौकी प्रभारी नेपाल सिंह ने अक्तूबर 2020 में एक चोर राम प्रकाश को पकड़ उसके पास से 900 रुपये बरामद करते हुए पूरे सात थानों में हुई नौ चोरियों का खुलासा किया था। मामले में 21 अक्तूबर को राम प्रकाश की जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान एडीजे हरेंद्र बहादुर सिंह ने पुलिस की फर्द देखी तो आश्चर्य में पड़ गए। उन्होंने दो थानों के प्रभारी निरीक्षकों को इस बरामदगी पर अपना पक्ष रखने के लिए तलब कर लिया
ऐसे दिखाई थी बरामदगी
दरोगा नेपाल सिंह ने राम प्रकाश के पास से बरामद 900 रुपये का बंटवारा भी कर दिया। इसके लिए फर्द में लिखा था कि पीजीआई के कॉरपोरेशन बैंक के बगल वाली दुकान से चोरी के 150 रुपये, हाईवे प्लाजा वाली दुकान में चोरी के 100 रुपये, उतरेठिया वाली दुकान के 100 रुपये, आशियाना के एलडीए कॉलोनी वाली दुकान के 50 रुपये, पावर हाउस चौराहा वाली दुकान के 100 रुपये, गोमतीनगर विजय खंड के मेडिकल स्टोर के 100 रुपये, सुशांत गोल्फ सिटी की फैमिली मार्ट की दुकान अर्जुनगंज के 100 रुपये, चौक के नक्खास वाली दुकान के 100 रुपये और पारा के साई मंदिर वाली दुकान से चोरी के 50 रुपये बरामद होना दिखाया।
दिव्यांग पर लगाया था पुलिस पर फायरिंग का आरोप
अलीगंज के गल्ला मंडी चौकी पर तैनाती के दौरान मूलरूप से सीतापुर के रहने वाले मनीष मिश्रा व उनके नौकर इरफान उर्फ राजू को एटीएम चोरी, पुलिस पर फायरिंग करने के मामले में जेल भेज दिया था। जबकि मनीष का नौकर दिव्यांग है और सिर्फ एक जगह बैठ कर ही काम कर सकता है। इस मामले में एक रिटायर आईपीएस व उनके बेटे संतोष सिंह के इशारे पर दरोगा नेपाल सिंह ने यह कार्रवाई की थी।
15 दिन बाद दी थी पत्नी की मौत की खबर
मनीष के मुताबिक जब वह जेल में था तो उसकी पत्नी ही पैरवी करती थी। लेकिन हादसे में उसकी भी मौत हो गई। इसकी सूचना भी मनीष को हादसे के 15 दिन बाद दी गई। इससे वह पत्नी के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो सका। मनीष का आरोप है कि जिस डीसीएम की टक्कर से उसकी पत्नी की मौत हुई वह आईपीएस के बेटे संतोष सिंह के घर आती-जाती थी। काफी प्रयास के बाद मुकदमा तो दर्ज हुआ, लेकिन आईपीएस के रसूख के आगे पुलिस ने इस मामले में संतोष के भाई अरविंद व उसकी पत्नी का नाम हटा दिया। मनीष के मुताबिक जब वह जमानत पर रिहा हुआ तो उस पर फिर से मुकदमा दर्ज कराने की साजिश रचने लगे। उस पर इन्हीं पुलिसकर्मियों की संस्तुति पर गैंगेस्टर की भी कार्यवाही की गई। मड़ियांव में किराए पर रहने वाली महिला को धमकाकर उससे दुष्कर्म का मुकदमा भी दर्ज कराया गया।