छात्रा प्रिया राठौर की मौत के मामले में पुलिस की भी लापरवाही उजागर हुई है। वारदात के बाद पुलिस ने प्रिया का कमरा सील नहीं किया था। प्रिया की कॉपी-किताब समेत तमाम चीजें अभी भी कमरे में ही रखी हैं। प्रिया के परिजनों ने इसे लेकर सवाल उठाए हैं। उनको आशंका है कि सुबूतों से छेड़छाड़ की जा सकती है या सुबूत गढ़े जा सकते हैं। वह जल्द ही उच्चाधिकारियों से मिलकर इस बारे में जानकारी देंगे।
जालौन निवासी जसराम राठौर की बेटी प्रिया राठौर (14) एसआर स्कूल से पढ़ाई कर रही थी। स्कूल के हॉस्टल में रहती थी। 20 जनवरी की रात प्रिया की हॉस्टल में ही संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। परिजनों ने अज्ञात पर हत्या का केस दर्ज कराया था। पुलिस ने फॉरेंसिक टीम से क्राइम सीन दोहराया था। बृहस्पतिवार को फॉरेंसिक टीम ने रिपोर्ट पुलिस को सौंपी। इसमें हादसे से इनकार किया गया और हत्या व आत्महत्या की आशंका जताई गई।
इस बीच एक नया तथ्य सामने आया। दरअसल प्रिया हॉस्टल के कमरा नंबर 208 में रहती थी। वारदात के बाद परिजन उसका एक बैग लेकर चले गए थे। इसमें कुछ कपड़े व कंबल था। जसराम के मुताबिक, अन्य सारा सामान वहीं रखा हुआ है। पुलिस की लापरवाही ये रही कि इस कमरे को सील नहीं किया।
बिखरा पड़ा मिला था सामान
कमरे में पांच अन्य छात्राएं भी रहती हैं। एक शिक्षिका भी उसी में रहती हैं। परिजनों ने बताया कि जब वह उस कमरे में गए थे तो तमाम सामान बिखरा पड़ा था। कहीं ऐसा तो नहीं कि सुबूतों से छेड़छाड़ की गई हो। साक्ष्य मिटाए गए हों। जसराम का कहना है कि हादसा या आत्महत्या दिखाने के लिए सुबूत बनाए भी जा सकते हैं। जानकारी के मुताबिक, पुलिस छानबीन करने के लिए भी उस कमरे तक नहीं गई। कुछ कागजात स्कूल प्रशासन ने पुलिस को दिए हैं।
किसी तरह के पत्र मिलने से इनकार
घटना से संबंधित सोशल मीडिया पर कुछ मैसेज चल रहे थे। इसमें दावा किया जा रहा था कि प्रिया के कॉपी-किताब से एक लेटर मिला है। इसे पुलिस ने कब्जे में ले लिया। इसमें किसी क्रिकेटर का जिक्र है, जो कश्मीर खेलने गया है। इस बारे में बीकेटी इंस्पेक्टर ने बताया कि ये पूरी तरह से गलत तथ्य है। कोई भी लेटर आदि नहीं मिला है। परिजनों का भी कहना है कि ये सब फर्जी है। कुछ लोग मामले की दिशा बदलने के लिए तथ्यहीन चीजें प्रसारित कर रहे हैं।
... इसलिए कमरा सील नहीं किया गया
एडीसीपी नॉर्थ अबीजीथ आर शंकर ने बताया कि छात्रा प्रिया के कमरे में अन्य छात्राएं भी रहती हैं। इसलिए कमरा सील नहीं किया गया था। जो छात्रा का सामान था वो उसके लॉकर में रखा गया था। कुछ सामान परिजन ले गए थे।