रायबरेली। बिजली कंपनियों के निजीकरण के निर्णय से कर्मचारियों और अभियंताओं में खासी नाराजगी है। इसके विरोध में शनिवार को अभियंता संघ की ओर से सांकेतिक विरोध सभा का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन प्रशासन की सख्ती के चलते विरोध सभा नहीं हुआ। निजीकरण को लेकर बिजली कर्मियों में नाराजगी है। इसको देखते हुए पुलिस प्रशासन अलर्ट है। उपकेंद्रों पर जहां पुलिस तैनात रही, वहीं मजिस्ट्रेट उपकेंद्रों का जायजा लेते रहे।
जिले में 54 विद्युत उपकेंद्र हैं। बिजली निगमों को निजीकरण की प्रक्रिया कई सालों से चल रही है। इसका लगातार विरोध होता रहा। इस बार भी निजीकरण कवायद शुरू होने से बिजली कर्मियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। प्रांतीय नेतृत्व में शाम पांच बजे से सांकेतिक विरोध सभा होना था। अभियंताओं को सिविल लाइंस स्थित अधीक्षण अभियंता कार्यालय के सामने एकत्रित होना था। इसकी भनक लगते ही प्रशासन सतर्क रहा। सुबह से सभी विद्युत उपकेंद्रों पर पुलिस ने डेरा डाल दिया। मजिस्ट्रेट भी घूम-घूम कर उपकेंद्रों का जायजा लेते रहे। इससे अभियंता और कर्मचारी अपने काम में व्यस्त थे। कोई विरोध सभा नहीं हो सकी।
विरोध सभा की नहीं है जानकारी
निजीकरण को लेकर होने वाले विरोध सभा की कोई जानकारी नहीं है। सभी अभियंता व कर्मचारी ओटीएस के प्रचार-प्रसार में लगे हैं।
-मुकेश कुमार अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण मंडल द्वितीय