सूत्रों का कहना है कि पहले बड़े पैमाने पर आईपीएस अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर जाते थे। इसके लिए सूचीबद्धता को 10 वर्ष की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) को आधार माना जाता था। मगर केंद्र में 360 डिग्री फॉर्मूले के आधार पर प्रतिनियुक्ति के लिए चयन होने लगा है। इसमें 10 वर्ष की एसीआर के साथ ही संबंधित अधिकारी के सीनियर, उनके समकक्ष व अधीन काम करने वालों का फीडबैक लिया जाता है।
यह व्यवस्था लागू होने के बाद प्रतिनियुक्ति के लिए चुने जाने वाले अधिकारियों की संख्या काफी कम हो गई। वहीं, इसी आधार पर लंबे समय से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात यूपी के दो आईपीएस अधिकारियों मुकुल गोयल और देवेंद्र सिंह चौहान को फिट नहीं पाया गया और दोनों को वापस भेजने की तैयारी है। ऐसे में जिस बैच के अधिकारियों को वर्ष 2018 में ही डीजी के पद पर प्रोन्नत हो जाना चाहिए था, उन्हें वर्ष 2020 तक इंतजार करना पड़ेगा।
वर्ष 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी मुकुल गोयल और 1988 बैच के देवेंद्र सिंह चौहान के प्रतिनियुक्ति से लौटने पर एडीजी कानून-व्यवस्था आनंद कुमार और कोऑपरेटिव सेल के एडीजी असित पंडा को डीजी बनने के लिए और इंतजार करना होगा। ऐसे ही दो आईजी असीम अरुण और एलवी एंटनी देव कुमार को भी एडीजी के रैंक पर प्रोन्नत होने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।