हजरतगंज पुलिस ने सरकारी ठेके एवं सप्लाई का काम दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले फर्जी राज्यमंत्री अभिषेक निगम की पीआरओ को रविवार दोपहर गिरफ्तार किया है।
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करोड़ों की जालसाजी व धोखाधड़ी के पांच मुकदमों में हजरतगंज पुलिस को उसकी तलाश थी। गिरोह में शामिल एक अन्य युवती समेत पांच जालसाजों की अभी तलाश जारी है। ढाई महीने से जेल में बंद फर्जी राज्यमंत्री ने अन्य प्रदेशों के बड़े व्यापारियों को ठगी का शिकार बनाया था।
इंस्पेक्टर हजरतगंज धीरेंद्र कुमार उपाध्याय ने बताया कि सात जनवरी को गिरफ्तार फर्जी राज्यमंत्री अभिषेक निगम के फरार साथियों की तलाश की जा रही थी। खुद को फर्जी राज्यमंत्री की पीआरओ बताने वाली भावना अरोड़ा के डालीबाग इलाके में मौजूद होने की भनक लगी। इस पर पुलिस टीम ने घेराबंदी करके उसे गिरफ्तार कर लिया।
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भावना ने खुद को बेकुसूर बताते हुए कहा कि अभिषेक की करीबी जाह्नवी पांडेय ने उससे दोस्ती बनाई थी और उसके कहने पर लोगों की अभिषेक से बात करा देती थी। सफाई दी कि करोड़ों की ठगी करती तो तंगहाली के दौर से न गुजर रही होती। मां टिफिन का काम करती है।
फर्जी ऑर्डर कर की थी 40 लाख की ठगी
मालूम हो, दिल्ली की मेसर्स वेलमेन हर्बल्स कंपनी के अधिकारी मनोज कुमार ने 7 जनवरी को अभिषेक निगम, उसकी साथी भावना अरोड़ा, उसके भाई सोनू अरोड़ा, असद, विवेक व एक अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
अभिषेक ने खुद को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री का पीआरओ बताकर साथियों की मदद से कंपनी प्रबंधन को प्रदेश सरकार के अनेक विभागों में पांच करोड़ के फिनायल व फ्लोर क्लीनर की सप्लाई ऑर्डर का झांसा देकर 40 लाख से अधिक की ठगी की।
इसी तरह खुद को मंत्री बताकर दिल्ली की ही एक अन्य कंपनी के पार्टनर अरुण सूद को 40 करोड़ के सप्लाई ऑर्डर के नाम पर 30 लाख ठगे। दोनों कंपनियों को फर्जी सप्लाई ऑर्डर थमा दिया।
अरुण सूद ने भी रिपोर्ट दर्ज कराई। इस पर पुलिस ने अभिषेक को गिरफ्तार किया, जबकि उसके साथी अंडरग्राउंड हो गए थे।
हत्थे चढ़ी भावना अरोड़ा ने कुबूला कि अभिषेक निगम और उसके साथियों द्वारा वर्ष 2012 में प्रदेश में सपा सरकार के गठन के कुछ समय बाद से ही जालसाजी शुरू की गई थी।
अभिषेक के विधायक व मंत्रियों से करीबी संबंध थे। कुछ दिनों तक वह खुद को मंत्री का पीआरओ बताकर लोगों को जाल में फंसाकर ठगी करता रहा। इसके बाद खुद को राज्य मंत्री बताने लगा। जाह्नवी, असद, विवेक, भावना अरोड़ा खुद को पीआरओ या सचिवालय कर्मचारी बताते थे।
मुख्य सचिव के वेटिंग रूम में करता था डील
फर्जी राज्यमंत्री अभिषेक निगम की गाड़ियों पर लालबत्ती ही नहीं सचिवालय पास भी लगा था।
वह गाड़ियों का काफिला लेकर बेधड़क एनेक्सी में दाखिल होता और मुख्य सचिव के वेटिंग रूम में बैठकर बड़े व्यापारियों को करोड़ों के सप्लाई ऑर्डर की डील करता था। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पारिवारिक कार्यक्रमों में भी शामिल होता था।