स्वास्थ्य कारणों से राजनीति में आज सक्रिय न रहने वाले अटल बिहारी वाजपेयी की फोटो भले ही कई बार पार्टी की होर्डिंगों से गायब हो जाती रही हो। या फिर लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान नरेंद्र मोदी की सभाओं में अटलजी का नाम गायब हो जाता रहा हो। लेकिन हर मुश्किल में भाजपा को उनका ही नाम याद आता है।
यह बात एक बार फिर साफ हो गई है। एक साल की नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियां बताने के लिए भी पार्टी अटल के नाम व काम के सहारे मैदान में उतरने जा रही है।
सूबे में 26 मई से हर जिले में शुरू होने वाले महासपंर्क अभियान के लिए तैयार फोल्डर पर अटल के साथ प्रधानमंत्री मोदी का फोटो छापा गया है। साथ ही मोदी सरकार द्वारा एक वर्ष में किए गए कामों का उल्लेख करने के साथ अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की उपलब्धियां छापी गईं हैं।
जनसंघ से भाजपा की यात्रा का उल्लेख करते हुए भाजपा की पंचनिष्ठाओं को भी छापा गया है। अभियान के दौरान यह फोल्डर लोगों में बांटा जाएगा।
इन कामों का है उल्लेख
फोल्डर में वाजपेयी सरकार द्वारा महंगाई पर नियंत्रण को उपलब्धि बताते हुए लिखा गया है कि देश में संचार (मोबाइल) क्रांति वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में आई थी।
देश में व्यापक चुनाव सुधार को अटल सरकार की उपलब्धि बताते हुए कारगिल विजय और सैनिकों के सम्मान का उल्लेख किया गया है।
यह भी बताया गया है कि देश में स्वर्णिम चतुर्भुज योजना, फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसे काम भी अटल सरकार ने शुरू कराए। पोखरण विस्फोट भी अटल सरकार ने किया गया।
दो जगह फोटो : खास बात यह है कि फोल्डर पर अटल जी की फोटो दो जगह छपी है। पार्टी चाहती तो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्षों वाली सूची में नाम छापकर भी काम चला सकती थी। पर, अलग से भी मोदी के साथ अटल की फोटो छापना अपने आप में केंद्र सरकार व भाजपा के लिए उनका महत्व और जरूरत को साबित कर देता है।
भाजपा के प्रति भरोसा पैदा करता है अटल का नाम
राजनीतिक समीक्षकों की मानें तो भाजपा नेताओं को ही नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री मोदी को अच्छी तरह पता है कि उनके पास अटल बिहारी का नाम ही ऐसा है जो लोगों को न सिर्फ आकर्षित करता है, बल्कि भाजपा के प्रति भरोसा भी पैदा करता है।
लोग आज भी अटलजी के नाम से ही जुड़ते हैं। इसलिए अटल का फोटो छापना और उनकी उपलब्धियों का उल्लेख करना भाजपा की मजबूरी है।
भगवा तड़का भी: भले ही राम जन्मभूमि मंदिर मुद्दे पर मोदी सरकार का एक साल चुप्पी में गुजरा हो। सिवाय एक साल पूरे होने के अंतिम मौके पर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के मजबूरी बताने के।
लेकिन महासंपर्क अभियान के लिए छपे फोल्डर में भाजपा रणनीतिकारों ने इशारों-इशारों में यह बताने की कोशिश की है कि उनके दिल में यह मुद्दा कहीं न कहीं आज भी जिंदा है।
शायद इसीलिए राम जन्मभूमि रथ यात्रा को छद्म सेक्युलरवाद के खिलाफ बताते हुए भगवा तड़का लगाया गया है।