प्रदेश के आईएएस अफसरों में देश का सबसे प्रतिष्ठित प्रधानमंत्री पुरस्कार पाने का क्रेज बढ़ने लगा है। भले ही अभी तक प्रदेश को तीन पुरस्कार ही मिले हों, लेकिन युवा आईएएस अफसरों में जोश देखते ही बनता है।
पिछले साल देश ही नहीं विदेशों तक में भी प्रदेश के युवाअफसरों के कार्यों को सराहा गया। इस बार भी भेजे जा रहे प्रस्ताव युवा अफसर अमृता सोनी व रौशन जैकब और उनकी टीम केनाम हैं।
प्रदेश को पुरस्कार मिलने की कहानी सीतापुर से 2005 में शुरू हुई। उन दिनों यहां जिलाधिकारी के पद पर आमोद कुमार तैनात थे।
आम जनता सरकारी कामों में परेशानियों से रूबरू होते देख उन्होंने लोकवाणी बनाने का फैसला किया। लोकवाणी यानी जनता की आवाज।
सीतापुर में इसकी सफलता के बाद 2006 में इसे पूरे प्रदेश में लागू किया गया। हर जिले केकलेक्ट्रेट में जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र समेत कई सरकारी काम अब लोकवाणी के माध्यम से होते हैं।
कुमार के इस बेहतरीन काम केलिए प्रदेश ने इसे टीम की श्रेणी में केंद्रीय प्रशासनिक सुधार मंत्रालय को भेजा और 2006-07 के लिए इसे प्रधानमंत्री पुरस्कार मिला।
कुमार की टीम में जोहरा चटर्जी, एसबी सिंह, उमाशंकर सिंह, देवेंद्र पांडे और एपी सिंह शामिल थे। हालांकि इसके बाद प्रदेश को पुरस्कार मिलने में छह साल लग गए।
लेकिन यूपी कॉडर के आईएएस अनुराग गोयल ने कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री में सचिव के पद पर रहते हुए 2008 में पुरस्कार हासिल किया।
पिछला साल रहा खास
पिछला साल पुरस्कारों के लिए स्वर्णयुग जैसा रहा। प्रदेश को न केवल दो प्रधानमंत्री पुरस्कार मिले, बल्कि कॉमनवेल्थ एसोसिएशन ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड मैनेजमेंट यानी कपाम की तरफ से भी पुरस्कार मिला।
यानी देश से विदेशों तक पुरस्कारों की धूम। उससे पहले आईएएस अफसर कामरान रिजवी को ई-गवर्नेंस के लिए प्रधानमंत्री की तरफ से पुरस्कार दिया गया।
इस सूचना प्रणाली के तहत गन्ना, तौल, चीनी मिल के बंद होने समेत जरूरी जानकारियां मोबाइल के जरिए किसानों को दी जाती हैं।
इसी साल उन्हें और उनकी टीम को गन्ना सूचना प्रणाली विकसित करने के लिए पुरस्कार मिला। उनकी टीम में अमिताभ प्रकाश, राजेश कुमार पांडे, अनिल कुमार, सत्येंद्र सिंह और वीरेंद्र बहादुर सिंह शामिल थे।
प्रदेश में करीब 28 लाख से ज्यादा गन्ना किसान हैं। वहीं व्यक्तिगत श्रेणी का पुरस्कार बदायूं के तत्कालीन डीएम अमित गुप्ता को मिला। गुप्ता ने बदायूं में रहते हुए वहां पर मैला ढोने की प्रथा को पूरी तरह से खत्म किया।
इस काम से जुड़े लोगों को रोजगार से जोड़ा, उनके बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलाया और सरकारी योजनाओं के जरिये उन्हें राशन उपलब्ध कराया।
उन्होंने वहां पर करीब तीस हजार लोगों को इस कार्य से हटाकर अन्य कार्यों में लगाया।
दोनों दावों में है दम इस बार भी प्रधानमंत्री पुरस्कार के लिए दो प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जा रहे हैं।
उम्मीद की जा सकती है कि इस बार भी दोनों पुरस्कार केंद्रीय कमेटी की तरफ से मंजूर हो जाएंगे। क्योंकि सूबे केमिड-डे मील की तारीफ कई बार केंद्र सरकार कर चुकी है और अन्य प्रदेशों की टीमों ने यहां का दौरा किया।
मिड-डे मील प्राधिकरण द्वारा तैयार किए गए आईवीआरएस यानी ‘इंटरएक्टिव वॉयस रिस्पांस सिस्टम’ में आईएएस अफसर आमोद कुमार की भी बड़ी भूमिका रही।
जब यह सिस्टम तैयार किया जा रहा था, वह वहां पर निदेशक केपद पर थे। फिलहाल वहां पर निदेशक के पद पर आईएएस अमृता सोनी हैं।
जबकि रौशन जैकब लोकवाणी के जरिये ग्रामीण इलाकों में एलपीजी वितरण में पारदर्शिता लाना चाहती है। उनका प्रस्ताव भी शासन ने प्रशासनिक सुधार मंत्रालय को भेज दिया है।
क्या है कपाम..
कपाम का अर्थ है कॉमनवेल्थ एसोसिएशन ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड मैनेजमेंट। यानी कई देशों का संगठन जो उत्कृष्ट काम करने वाले आईएएस अफसरों को पुरस्कार देता है।