संगीत नाटक अकादमी में नाटक के हैमलेट के मंचन के दौरान कलाकार।
लखनऊ। जुर्म ज्यादा दिनों तक छिप नहीं सकता है, एक न एक दिन सच की विजय होती है। कुछ इसी संदेश के साथ नाटक हैमलेट ने दर्शकों को हंसाने के साथ सिखाया भी।
भारतेंदु नाट्य अकादमी की ओर से संगीत नाटक अकादमी में आयोजित नाटक में भारतीयता के कई रंग देखने को मिले। विलियम शेक्सपीयर लिखित नाटक को जाॅय मैस्यनम ने निर्देशित किया है और रांघेय राघव ने रूपांतरित किया।
मंचन बीएनए के दूसरे वर्ष के छात्रों ने किया। यह छात्र कुछ दिनों के लिए छत्तीसगढ़ छऊ लोकनृत्य सीखने गए थे। उन्होंने नाटक को छऊ नृत्य में ढाल कर पेश किया गया।
नाटक में दिखाया गया कि हैमलेट के पिता का देहांत हो जाता है। कुछ दिनों बाद उसके सपने में पिता आते हैं और कहते हैं कि तुम्हारे चाचा को तुम्हारी मां पसंद थी जिसकी वजह से उसने मेरी हत्या कर शादी रचा ली। नींद खुलते ही हैमलेट बौखला जाता है और उसका बदला लेता है।