दलितों का उत्पीड़न और उनकी जमीन हथियाने के लिए अपनाए जा रहे हथकंडों पर आधारित नाटक ‘23 मार्च, 2014 भगाणा कांड’ का मंचन रविवार को राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में चल रहे बहुजन नाट्य समारोह में दूसरे दिन हुआ।
समारोह की दूसरी प्रस्तुति ‘थेरी गाथा’ में भगवान बुद्ध का स्त्रियों के प्रति सम्मान और प्रेम दिखाया गया। दोनों ही नाटकों में बच्चों ने मनमोहक अभिनय का परिचय दिया।
बहुजन नाट्य अकादमी की ओर से प्रस्तुत नाटक ‘23 मार्च 2014 भगाणा कांड’ पुस्तक ‘भगाणा की निर्भयाएं’ पर आधारित है, जिसका निर्देशन श्याम कुमार ने किया।
कहानी शुरू होती है कि ग्राम समाज की जमीन कब्जाने के लिए प्रधान दलित परिवारों का उत्पीड़न करता है, जिसमें उनकी बहू-बेटियों से बलात्कार की घटनाएं भी सामने आती हैं।
मंचन के जरिए सवाल उठाया गया कि आखिर दलितों और पिछड़ी जाति की लड़कियों के साथ बलात्कार के मामलों में चुप्पी क्यों साध ली जाती है।
नाट्य समारोह में मंचित दूसरा नाटक ‘थेरी गाथा’ बौद्ध त्रिपिटक साहित्य का अति महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें भगवान बुद्ध की समकालीन भिक्षुणियों के जीवन अनुभव की अभिव्यक्ति है।
नाटक दिखाता है कि भगवान बुद्ध नारियों व पुरुषों में कोई भेदभाव नहीं करते। उन्होंने सबसे पहले भिक्षुणी संघ की स्थापना की, जिसमें 73 भिक्षुणिया थीं। निर्देशन अर्चना आर्या व श्याम कुमार का रहा।