‘आए थे हरिभजन को, ओटन लगे कपास’ यह कहावत उन युवाओं पर सटीक बैठती है, जो
घरद्वार छोड़कर पढ़ने के लिए शहरों में आते हैं और बुरी संगत में फंसकर
मकसद से भटक जाते हैं।
रविवार को रायउमानाथ बली प्रेक्षागृह में भी एक युवा
अपने मकसद से भटकता नजर आया। जो शाहरुख फोर्स की ओर से मंचित नाटक ‘मकसद’
में मुख्य किरदार का रोल निभा रहा था।
लक्ष्य उच्च शिक्षा के लिए डॉ.
अवंतिका राज के प्रतिष्ठित गुरुकुल शिक्षण संस्थान में दाखिला लेता है। पर,
बुरे लोगों की संगत में वह अपने मूल मकसद से भटक जाता है।
जिसका खामियाजा
उसे अपनी मां को खोकर भुगतना पड़ता है। नाटक के जरिए जीवन में मकसद के होने
की अहमियत भी जाहिर की गई। नाटक में निर्देशन शैलेंद्र मिश्र का रहा।