एक झूठ को छिपाने के लिये हजारों झूठ बोलने पड़ते हैं। इसी कथानक को मंच पर उतारते सूर्या रंगमंडल के हास्य नाटक ‘उलझन’ का मंचन बृहस्पतिवार को राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में हुआ।
सवा घंटे से अधिक अवधि केनाटक का निर्देशन आनंद शर्मा ने किया। मंचन में अपनी मकान मालकिन जानकी के यहां किराये पर रह रहा बनारसी खुद को शादीशुदा बताकर रह रहा है, लेकिन एक दिन उसकी हरकतों पर शक होने पर मकान मालकिन उसे नोटिस देती है कि या तो वो अपनी पत्नी को लेकर आये या मकान छोड़े।
आफत से पिनटने के लिये बनारसी एक जरूरतमंद डाॅक्टरनी को अपनी पत्नी बनाकर ले आता है, लेकिन शक की गुंजाइश कहीं न कहीं रह जाती हे।
लुकाछिपी के बीच मकान मालकिन अपनी बेटी की शादी बनारसी से करना चाहती है।
गुदगुदाते मंचन में सारा बना बनाया खेल आखिर में बनारसी के बाबू जी शादी की अंगूठी निकाल कर चौपट करते हैं। नाटक में मार्शल, अल्तमश आजमी और रमा जायसवाल मंच पर उतरे।