पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने का पर्व पितृपक्ष शनिवार से शुरू होगा। ज्योतिषियों के मुताबिक पूर्णिमा को मृत्यु पाए पूर्वजों का तर्पण-श्राद्ध शुक्रवार को ही करना श्रेयस्कर रहेगा।
गोमतीनगर निवासी आचार्य प्रदीप ने बताया कि गुरुवार देर रात 2:22 बजे से पूर्णिमा लग गई, जो शुक्रवार रात 12:49 तक ही रहेगी। इसलिए पूर्णिमा को मृत्यु पाए पूर्वजों का श्राद्ध शुक्रवार को ही करना श्रेयस्कर रहेगा।
शनिवार सुबह आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा लगने से पितृपक्ष में पितरों का पूजन-तर्पण शुरू हो जाएगा। आचार्य ने बताया कि जिन तिथियों में पूर्वजों की मृत्यु होती है, यजमानों को पितृपक्ष के दौरान उन्हीं तिथियों में अपने पितरों का तर्पण करना चाहिए।
पितरों का श्राद्ध-तर्पण मध्याह्न में किया जाना श्रेयस्कर रहता है। सुबह स्नान-पूजन के बाद तर्पण के साथ पिंडदान करना चाहिए। हथेली भर अनाज का पिंड (जौ के आटे या खीर या गौ दुग्ध के खोये) बनाकर उसे पितरों को अर्पित करना चाहिए।
इसके अलावा गंगाजल, कुश, काले तिल, फूल-फल और दुग्ध व उनसे बने खाद्यान्न अर्पित करने चाहिए। मध्याह्व से पूर्व ब्राह्मण को भोजन कराने के साथ उन्हें यथा योग्य वस्त्रादि दान देना चाहिए।