लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में अब अभ्यर्थी ढाई साल में भी पीएचडी पूरी कर सकेंगे। साथ ही अगले सत्र से साल में दो बार पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। इस संबंध में कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने सभी विभागाध्यक्षों को आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं।
ढाई साल में पीएचडी पूरी करने की वरीयता उन्हीं शोधार्थियों को मिलेगी, जिनके शोध पत्र अधिक प्रकाशित होंगे। विशेष परिस्थितियों में संकाय सदस्यों के अधीन पीएचडी सीटों की संख्या भी बढ़ाई जा सकेगी।
बृहस्पतिवार को कुलपति ने गणितीय खगोलशास्त्र विभाग का औचक निरीक्षण किया और विभागीय गतिविधियों की समीक्षा की। इस दौरान 1946 में स्थापित विश्वविद्यालय के पहले प्लेनेटेरियम का भी निरीक्षण किया गया। कुलपति ने आधुनिक उपकरणों की आवश्यकता को देखते हुए विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही प्रत्येक विभाग के पुस्तकालयों में ई-जर्नल्स, गणितीय डाटाबेस और संबंधित सॉफ्टवेयर तक पहुंच बढ़ाने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। प्लेनेटेरियम के लिए नए खगोल उपकरणों का प्रस्ताव भी विभाग से मांगा गया है।
गैर-जेआरएफ पीएचडी छात्रों को मिलेगी फेलोशिप विश्वविद्यालय में गैर-जेआरएफ पीएचडी छात्रों के लिए फेलोशिप सुविधा शुरू की जाएगी। इसका उद्देश्य शोधार्थियों को आर्थिक संबल देना है। ताकि वे पूरी तरह शोध पर ध्यान केंद्रित कर सकें। कुलपति के अनुसार इससे शोध की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
चार जिलों में बनेंगे शोध केंद्र
लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध सीतापुर, हरदोई, रायबरेली और लखीमपुर जिलों के कॉलेजों में शोध केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इससे वहां अध्ययनरत विद्यार्थियों को शोध के अधिक अवसर मिलेंगे। साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय के शोध पर्यवेक्षण मॉडल को भी लविवि में लागू किया जाएगा।
दो दिवसीय दीक्षांत समारोह की तैयारी
अब विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह दो दिन तक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान गोल्डन प्राइड डिनर का भी आयोजन होगा। यह व्यवस्था अगले सत्र से लागू करने की तैयारी है।