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पीएचडी करने वाले छात्र बनेंगे ‘टीचिंग असिस्टेंट’

Fri, 18 Oct 2013 12:14 AM IST
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ
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अब पीएचडी करने वाले प्रतिभावान छात्रों को विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में टीचिंग असिस्टेंट के रूप में भर्ती किया जाएगा। इन्हें एक निश्चित मानदेय देकर पढ़ाने का मौका दिया जाएगा।
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नेशनल मिशन ऑन टीचर्स एंड ट्रेनिंग के तहत उच्च शिक्षा में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए यह प्रयोग किया जाएगा। यही नहीं रिटायर होने के बाद टीचरों का रीएम्प्लायमेंट भी किया जाएगा।

रिटायरमेंट के बाद टीचर विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में पढ़ा सकेंगे। इसके अलावा अब टीचर दूसरे कॉलेज में जाकर भी पढ़ा भी सकेंगे।

उनको इसका अलग से मानदेय दिया जाएगा, ताकि विशेषज्ञ शिक्षकों का लाभ अधिक से अधिक स्टूडेंट्स को मिल सके।

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यही नहीं पीएचडी कर चुके अस्थाई शिक्षकों को स्थाई किया जाएगा। इस पूरी कवायद से उच्च शिक्षा में 40 से 50 प्रतिशत शिक्षकों के खाली पद भरे जा सकेंगे।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड में पास हुए इस प्रस्ताव पर सहमति जता दी है। यूपी की ओर से उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी भी इस बैठक में शामिल हुए।
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इसमें टीचर्स की कमी को दूर करने के लिए यह मॉडल सभी राज्यों को लागू करने को कहा गया है। बैठक में तय किया गया कि टीचिंग असिस्टेंट के रूप में पढ़ाने वाले पीएचडी छात्र को कम से कम 25 हजार रुपये मानदेय मिलेगा।

वहीं री-इम्प्लायमेंट के तहत टीचर पांच वर्ष तक और पढ़ा सकेंगे। इसमें केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की सेवानिवृत्त आयु 65 वर्ष है इसलिए यहां 70 वर्ष की उम्र तक टीचर पढ़ा सकेंगे।

राज्य विश्वविद्यालयों व सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेजों में 62 वर्ष में शिक्षक रिटायर होते है। ऐसे में यहां 3 वर्ष का री-इम्प्लायमेंट मिलेगा। जबकि राजकीय डिग्री कॉलेजों में शिक्षक 65 वर्ष तक पढ़ा सकेंगे।

इसके अलावा विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में टीचर्स एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत टीचर अलग से पढ़ा सकेंगे। खासकर मानदेय पर पढ़ाने वाले शिक्षकों को फायदा होगा।

वे अब दूसरे विश्वविद्यालय व कॉलेजों में संबंधित विषय पढ़ाने जाएंगे तो उन्हें अलग से मानदेय मिलेगा। वहीं विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में पढ़ाने वाले पीएचडी धारक अस्थाई शिक्षकों को स्थाई किया जाएगा।

इसके अलावा सभी राज्यों में उच्च शिक्षा में शिक्षकों के खाली करीब एक लाख पदों को भी जल्द से जल्द भरा जाएगा। राज्यों से इसका ब्यौरा मांगा जाएगा। नियुक्त होने वाले शिक्षकों के वेतन का 50 प्रतिशत भार केन्द्र सरकार पांच वर्षों तक उठाएगी।

उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. रामानंद प्रसाद ने बताया कि इस बैठक में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत मॉडल डिग्री कॉलेज खोलने और सत्र 2013-14 के बजट पर भी चर्चा हुई।

इसमें 65 प्रतिशत खर्च केन्द्र सरकार व 35 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार उठाएगी। इसके लिए जल्द ही केन्द्र सरकार से बजट मांगा जाएगा। इसके अलावा ई-कन्टेंट और ई-पाठशाला को और प्रभावी बनाए जाने पर जोर दिया जाएगा।

नेशनल मिशन ऑन एजुकेशन थ्रू इनफॉर्मेशन एंड टेकभनोलॉजी के तहत ई-कन्टेंट को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए 12 राज्य विश्वविद्यालयों को यूपी सरकार की ओर से 25 प्रतिशत धनराशि दे दी गई है बाकी धनराशि केन्द्र सरकार सीधे देगी। इससे छात्रों की पढ़ाई का दायरा और बढ़ेगा।
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