लखनऊ। किसी भी सरकारी संस्थान से फेलोशिप हासिल करने वाले मेधावियों को पीएचडी दाखिले में वरीयता मिलेगी। लविवि के प्रस्तावित पीएचडी आर्डिनेंस में जेआरएफ और अन्य फेलोशिप वाले मेधावियों को सीधे विकल्प पर विचार किया जा रहा है। सीट के मुकाबले ज्यादा आवेदन होने पर इनके बीच प्रवेश परीक्षा कराई जाएगी। साथ ही पीएचडी आर्डिनेंस के तहत महिला और दिव्यांगों को 10 साल तक की अवधि में पीएचडी थीसिस जमा करने का मौका भी दिया जा सकता है।
लविवि की डीन एकेडमिक्स प्रो. पूनम टंडन ने बताया कि विवि अनुदान आयोग से निर्देश मिलने के बाद पीएचडी आर्डिनेंस में बदलाव किया जा रहा है। इसके लिए समिति बनाई गई है। यूजीसी की गाइडलाइन में किसी प्रकार की फेलोशिप पाने वाले अभ्यर्थियों को सीधे दाखिला देने की बात कही गई है। इसका मकसद है कि फेलोशिप पाने वाले अभ्यर्थी दाखिले से वंचित न रहें। पीएचडी में दाखिला न मिलने पर ऐसे अभ्यर्थियों को फेलोशिप का भुगतान नहीं हो पाता है। इसे देखते हुए पीएचडी के नए आर्डिनेंस में फेलोशिप पाने वाले अभ्यर्थी को प्राथमिकता पर रखने की बात कही गई है। एक बड़े बदलाव के तहत पीएचडी कोर्स वर्क में अब अभ्यर्थियों को आठ के बजाय 12 क्रेडिट हासिल करने होंगे। इसके लिए कोर्स वर्क में पब्लिकेशन एथिक्स पर एक अतिरिक्त पेपर बढ़ाया जाएगा।
अधिकतम अवधि में भी इजाफा लविवि में पीएचडी थीसिस जमा करने के लिए इस समय न्यूनतम अवधि तीन साल है। शोधार्थी को तीन से लेकर छह साल के बीच अपनी थीसिस जमा करनी होती है। इस अवधि में प्रसूति अवकाश व कुछ अन्य स्थितियों में एक साल तक की छूट देने का विकल्प भी मौजूद है। अब यह अवधि और भी बढ़ाई जा सकती है। नए आर्डिनेंस में दिव्यांग और महिलाओं के मामले में पीएचडी जमा करने की अधिकतम अवधि 10 साल तक करने की योजना है। पीएचडी का प्रस्तावित आर्डिनेंस तैयार होने के बाद विभिन्न शैक्षणिक समितियों से पास करने के बाद कार्य परिषद से मंजूरी के लिए रखा जाएगा। अंतिम मुहर के लिए इसे राजभवन भेजा जाएगा। राजभवन से मंजूरी मिलने के बाद ही नए पीएचडी आर्डिनेंस के हिसाब से दाखिले होंगे।