लखनऊ। जिला पंचायत क्षेत्र में 50 हजार रुपये तक की पूंजी वाली दुकानों या व्यापार पर लाइसेंस की अनिवार्यता नहीं होगी। ऐसे दुकानदारों से लाइसेंस शुल्क भी नहीं लिया जाएगा। जिला पंचायत बोर्ड ने पूर्व की सीमा 20 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही लाइसेंस शुल्क की वर्तमान की दरों में 15 फीसदी की बढ़ोतरी भी की गई है।
बुधवार को जिला पंचायत सभागार में अध्यक्ष आरती रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। बोर्ड ने प्रस्ताव पास किया कि मनरेगा व प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में जिला पंचायत सदस्यों के प्रस्ताव भी शामिल कराए जाएं। इसके साथ ही मनरेगा श्रम बजट 2023-24 में 52.06 करोड़ रुपये श्रम पर व्यय और 34.70 करोड़ रुपये आवश्यक सामग्री पर व्यय सहित 86.77 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी गई। इसके अलावा जिला पंचायत के 41.52 करोड़ रुपये का पुनरीक्षित बजट 2022-23 और 38.76 करोड़ रुपये मूल बजट 2023-24 को भी अनुमोदन दे दिया गया। जिला पंचायत की बैठक में बुधवार को एकमात्र विधायक अमरेश कुमार ही मौजूद रहे। इसके अलावा कोई और विधायक, सांसद, राज्यसभा सदस्य, विधान परिषद सदस्य बैठक में शामिल नहीं हुआ।