इंजीनियरिंग की राह चली फार्मेसी, खाली रहेंगी 7812 सीटें
एकेटीयू : इस साल 105 और नए फार्मेसी संस्थान खुले
पिछले कुछ वर्षों से प्रदेश के इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश लेने वालों का टोटा रहता था, लेकिन अब फार्मेसी भी उसी राह चल निकली है। आंकड़ों के अनुसार, नए सत्र में प्रवेश से पहले ही फार्मेसी की 7812 सीटें खाली रहेंगी।
एकेटीयू से संबद्ध कॉलेजों में सबसे बड़ी संख्या फार्मेसी संस्थानों की है। वहीं इस साल 105 नए फार्मेसी संस्थान और खोले जाने से प्रदेश में कॉलेजों की संख्या 373 हो गई है। इन कॉलेजों में बीफार्मा की 24523 सीटें हैं, जबकि प्रवेश परीक्षा में क्वालीफाई छात्र मात्र 16711 ही हैं। ऐसे में प्रवेश परीक्षा से पहले ही इसकी 7812 सीटें खाली रहेंगी। अब तक खराब स्थिति में चल रहे बीटेक में यह आंकड़ा अपेक्षाकृत कम ही है। प्रदेश में एकेटीयू से संबद्ध 204 इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। जहां बीटेक की 73151 सीटें हैं, जबकि एसईई क्वालीफाई अभ्यर्थी 69793 हैं। ऐसे में यहां प्रवेश से पहले 3358 सीटें खाली रहना तय है।
इसी क्रम में इस साल भी एमबीए की स्थिति खस्ताहाल ही है। एमबीए के एकेटीयू से संबद्ध 285 संस्थान हैं, जिनमें 25562 सीटें हैं, जबकि एसईई क्वालीफाई अभ्यर्थियों की संख्या मात्र 7855 ही है। इस डेटा के अनुसार, यहां प्रवेश से पहले ही 17707 सीटें खाली रहना तय है। एमसीए के एकेटीयू से संबद्ध संस्थान 77 हैं, जहां 4415 सीटें हैं, जबकि एसईई क्वालीफाई अभ्यर्थी 3529 हैं। इस तरह यहां 886 सीटें खाली रहेंगी।
बीआर्क में एक सीट पर तीन अभ्यर्थी
प्रवेश के मामले में सबसे अच्छी स्थिति में आर्किटेक्चर है। प्रदेश में एकेटीयू से संबद्ध 18 कॉलेज हैं, जिसमें 670 सीटें हैं। एसईई क्वालीफाई अभ्यर्थियों की संख्या 2695 है। इस तरह यहां एक सीट पर तीन अभ्यर्थियों के बीच मुकाबला होगा।
तेजी से बढ़ रहे कॉलेज
फार्मेसी प्रवेश में दो ही साल में गिरावट दर्ज होना चिंताजनक है। हालांकि इसका एक कारण कॉलेजों की संख्या का तेजी से बढ़ना भी है। इस पर सख्ती की जाएगी। इस क्षेत्र में प्लेसमेंट की कम संभावना भी कम प्रवेश का एक कारण है। नीट के चलते भी फार्मेसी में प्रवेश लेने वालों की संख्या कम हुई है।
- प्रो. विनय कुमार पाठक, कुलपति, एकेटीयू