पीजीआई में हुए दवा घोटाले में ओपीडी फॉर्मेसी प्रभारी को हटाया गया।
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एसजीपीजीआई में हुए दवा घोटाले में बृहस्पतिवार को एक पेशेंट हेल्पर को ओपीडी फार्मेसी से हटा दिया गया जबकि दो अन्य संविदाकर्मियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया।
इससे पहले 18 संविदाकर्मियों की सेवा समाप्त की जा चुकी है। वहीं, संविदाकर्मियों ने स्थायी कर्मचारियों के निलंबन की मांग की है। आरोप है कि यह घोटाला नियमित कर्मियों की देन है।
संस्थान में 55 लाख रुपये के दवा घोटाले में शामिल होने के आरोप में ओपीडी फार्मेसी प्रभारी निशांत सिंह को वहां से हटाकर राजधानी कोविड अस्पताल भेजा गया है जिसका चार्ज पहले भी इसके पास रह चुका है।
बताया जा रहा है कि निशांत संस्थान के एक बड़े अधिकारी के सहयोगी का रिश्तेदार है, इसके चलते पेशेंट हेल्पर होने के बावजूद उसे फार्मेसी का प्रभारी बनाया गया था। इसके अलावा दो अन्य कर्मियाें को हटाया गया है।
वहीं, ओपीडी फार्मेसी में रिकॉर्ड की जिम्मेदारी टेक्नीशियन दीपक को दी गई है। जबकि इसका काम रिकॉर्ड रूम में फाइलों को रखना और मरीजों को देना है।
बताया जाता है कि कुछ अधिकारियों की मेहरबानी के चलते ऐसा किया गया। पीएमएसएसवाई स्थित फार्मेसी की जिम्मेदारी केके गुप्ता को दी गई है। अधिकारी कहते हैं कि पीजीआई की कमेटी और पुलिस की जांच अभी चल रही है।
अब चलेगी ओटीपी व्यवस्था
पीजीआई प्रशासन का कहना है कि पोस्ट डिपॉजिट (पीडी) मरीजों के खाते से फर्जीवाड़ा रोकने के लिए ओटीपी व्यवस्था लागू की जाएगी। गुरुवार को अधिकारियों ने ओपीडी का निरीक्षण किया। कंप्यूटर पर पीडी खाता वाले मरीजों के मोबाइल नंबर इससे जोड़े जाएंगे।