लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई को विश्व स्तर का चिकित्सा संस्थान बनाने के लिए सरकार ने धनवर्षा की है। संस्थान के बजट में करीब दोगुने का इजाफा करते हुए इस वर्ष 2,446 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। बीते साल का बजट 1292 करोड़ रुपये था। बढ़ा हुआ बजट मुख्य रूप से संस्थान को क्वाटर्नरी हेल्थ केयर चिकित्सा केंद्र बनाने के लिए है।
संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमन ने बताया कि संस्थान को 359 करोड़ रुपये निर्माण कार्यों के लिए मिले हैं। निर्माण कार्य और उपकरण व संयंत्र के लिए जो राशि आवंटित की गई है, उसका उपयोग क्वाटर्नरी हेल्थ केयर चिकित्सा केंद्र स्थापित करने में किया जाएगा। क्वाटर्नरी हेल्थ केयर चिकित्सा सेवाओं का सबसे उच्च और विशिष्ट स्तर है। इस पहल के तहत संस्थान में 500 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक समेकित केंद्र में कार्डियक साइंसेज, न्यूरो साइंसेज, रीनल साइंसेज, गैस्ट्रो-इंटेस्टाइनल, हेपैटिक सेवाएं, क्रिटिकल केयर, मैटरनल और फेटल मेडिसिन, ऑन्कोलॉजी, जीन एवं सेल थेरेपी और दुर्लभ बीमारियों की जीनोमिक सेवाओं का विकास किया जाएगा। इनके साथ ही ट्रॉमा सेंटर की सुविधाओं में इजाफा होगा।
एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में गंभीर मरीजों को मिलेगा बेहतर इलाज
पीजीआई का एपेक्स ट्रॉमा सेंटर आने वाले दिनों में गंभीर मरीज और घायलों के इलाज का प्रमुख केंद्र बनने वाला है। सरकार ने एपेक्स ट्रॉमा सेंटर को 100 करोड़ आवंटित किए हैं। अभी तक केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर पर ही घायलों का सबसे ज्यादा बोझ है। एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में सुविधा बढ़ने से मरीजों का बोझ केजीएमयू से कम होगा।
निशुल्क इलाज के लिए दो करोड़ रुपये
संस्थान में गरीबी रेखा से नीचे, विपन्न और लावारिस मरीजों के इलाज के लिए दो करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं। इस राशि से इनका निशुल्क इलाज किया जाएगा। इसके साथ ही संस्थान को वेतन मद में 900 और गैर वेतन मद में 375 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।