दरअसल सरकार का पिछले साल अक्तूबर में दोनों पेट्रोलियम पदार्थों पर वैट दर को घटाने के पीछे सरकार का मानना था कि दाम कम होने से अगर कंजप्शन बढ़ेगा तो राजस्व में होने वाली कमी की भरपाई हो जाएगी।
विभाग के एक उच्चाधिकारी ने बताया कि वैट दर घटाने के बाद भी बीते 10 महीने में पेट्रोल व डीजल के कंजपप्शन में कोई खास वृद्धि नहीं हुई, इससे सरकारी खजाने को लगातार नुकसान हो हो रहा था। इसके मद्देनजर ही सरकार ने अपना फैसला पलटते हुए घटाये हुए वैट को पुन: बढ़ाने का फैसला किया है। ताकि राजस्व को बढ़ाया जा सके।