कांग्रेस नेतृत्व से बगावत कर भाजपा का समर्थन करने वाली कांग्रेस विधायक अदिति सिंह की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की याचिका खारिज कर दी गई।
सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने ये फैसला सुनाया। इसके साथ ही कांग्रेस के एक अन्य विधायक राकेश सिंह की सदस्यता रद्द करने की याचिका भी खारिज कर दी गई।
इस फैसले से कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है क्योंकि पार्टी विरोधी रुख अपनाने के बाद अदिति सिंह की सदस्यता रद्द करने के लिए कांग्रेस नेतृत्व ने याचिका दाखिल की थी। अदिति सिंह रायबरेली के सदर से कांग्रेस विधायक हैं और तमाम मौके पर पार्टी विरोधी रुख अपनाती रही हैं।
उन्होंने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के फैसले पर केंद्र की मोदी सरकार का समर्थन किया था। इसके अलावा कोरोना काल में अलग-अलग शहरों से यूपी के लिए पलायन कर रहे मजदूरों की मदद के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने जब बसें भेजी तो अदिति सिंह ने प्रियंका को ही निशाने पर ले लिया और सार्वजनिक तौर पर उनके इस कठोर फैसले की निंदा की।
अदिति सिंह ने कहा कि कांग्रेस महासचिव को इस मुश्किल समय में राजनीति करने से बाज आना चाहिए था। उन्होंने कहा कि बसें चलाने के लिए प्रियंको मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अनुमति लेनी चाहिए थी। जिस पर कांग्रेस की प्रदेश इकाई ने नाराजगी जाहिर की।
भाजपा ने उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने का फैसला देकर उन्हें अभयदान दिया है। अदिति सिंह के भाजपा में शामिल होने की भी अटकलें हैं। यहां तक कि देर-सबेर उनका भाजपा में जाना तय माना जा रहा है।
इस पर कांग्रेस के रायबरेली जिलाध्यक्ष पंकज तिवारी का कहना है कि सदर विधायक अदिति सिंह को पहले ही पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित किया जा चुका है। हमारी पार्टी उन्हें कांग्रेस का विधायक ही नहीं मानती। उन्होंने पार्टी का कहना ना मानकर हमेशा पार्टी लाइन से हटकर काम किया, जो कि गलत है।