प्रदेश में हाल ही तैनात दस नए सूचना आयुक्तों की तैनाती की अधिसूचना को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में चुनौती दी गई है। कोर्ट ने इस मामले में सरकारी वकील को सरकार से निर्देश (जानकारी) प्राप्त करने के लिए दस दिन का समय दिया है।
न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी व न्यायमूर्ति आलोक माथुर की खंडपीठ ने यह आदेश स्थानीय वकील मनेंद्रनाथ राय की याचिका पर दिया। याची ने सूचना आयुक्तों संबंधी अधिसूचना को कानून की मंशा के खिलाफ बताते हुए इसे रद्द किए जाने का आग्रह किया है।
याचिका में कहा गया है कि संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत सूचना आयुक्तों के रूप में चयनित लोग सार्वजनिक जीवन में प्रख्यात होने चाहिए। इस प्रावधान का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मनमाने तरीके से दस सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की गई।
सरकारी वकील ने प्रकरण में निर्देश प्राप्त करने के लिए दस दिन का समय दिए जाने की गुजारिश की। इस पर कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दस दिन बाद नियत की।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश शासन की ओर से राज्य सूचना आयुक्तों को 22 फरवरी को नियुक्त किया गया था । इन पदों के लिए चयनित नामों पर राज्यपाल ने अपनी मुहर लगाई थी। राज्यपाल ने राजीव कपूर, सुबेश कुमार सिंह,नरेंद्र श्रीवास्तव, रचना पाल, किरण बाला, हरवर्धन शाही ,अजय उप्रेती, प्रमोद कुमार तिवारी, सुभाष सिंह व चंद्रकांत पांडेय को राज्य सूचना आयुक्त बनाया था।