अयोध्या विधायक वेद प्रकाश गुप्त ने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रामलला का जन्मोत्सव भी दूरदर्शन पर लाइव दिखाया जाना चाहिए। बताया कि वे विधायक बनने के बाद पहली नवरात्र में कनक भवन में जन्मोत्सव के लाइव प्रसारण के लिए प्रमुख सचिव सूचना रहे अवनीश अवस्थी से आदेश जारी कराए थे, अब वही अधिकारी गृह विभाग के सर्वेसर्वा हैं, ऐसे में रामलला का लाइव प्रसारण भक्तों को जरूर सुलभ होगा। वे यह प्रस्ताव अपनी ओर से भी भेजेंगे।
1528 से पहले वाला नहीं है रामलला का विग्रह
श्रीरामजन्मभूमि पर विराजमान रामलला का विग्रह 1528 में मीरबाकी के हमले से पहले वाला नहीं है। रामजन्मभूमि मामले में पक्षकार रहे निर्वाणी अनी अखाड़ा के महंत धर्मदास कहते हैं कि 23 दिसंबर 1949 को जब रामलला का प्राकट्य उनके गुरु बाबा अभिरामदास ने वहां रामलला की मूर्ति प्रतिष्ठापित किए थे। फिर जब 6 दिसंबर 1992 को रामभक्तों ने ढांचा ढहाना शुरू किया तो वे एक बक्से में रामलला समेत चारों भाइयों व हनुमान जी का विग्रह रखकर हनुमानगढ़ी ले आए थे। बाद में जन्मभूमि को ऊंचा करके स्थापित किया गया था।
अब यही रामलला का विग्रह विराजमान हैं। वे कहते हैं कि अयोध्या के कालेराम मंदिर व ओरछा की रानी को सरयू में पुराना विग्रह मिलने की बातें कही जाती हैं, लेकिन कोई पौराणिक तथ्य नहीं है। अयोध्या पर शोध करने वाले पूर्व आईपीएस कुणाल किशोर कहते हैं कि मध्यप्रदेश के ओरछा में राजा राम के रूप विराजमान मूर्ति भी रामलला से जोड़कर बताई जाती है। इसे मधुकरशाह की रामभक्त महारानी गणेश कुंवरि संवत 1631 में अयोध्या से लेकर आईं थीं। लेकिन इसकी कोई तथ्यात्मक व ग्रंथिय उल्लेख नहीं मिलता। सब भक्तमाल की कहानियां हैं।