रायबरेली। भीषण गर्मी में बिजली की खपत तेजी से बढ़ रही है। हालत यह है कि 220 मेगावाट से बिजली की खपत पार होकर 275 मेगावाट पहुंच गई है। ऐसे में बिजली कटौती से लोग परेशान हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो बमुश्किल आठ से दस घंटे ही बिजली आ रही है। शहर और कस्बों में लो वोल्टेज और ट्रिपिंग की समस्या बनी हुई है। रोस्टर के मुताबिक शहर में 24 घंटे व ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली की आपूर्ति होनी चाहिए।
बिजली की समस्या इस समय गर्मी के बाद दूसरी सबसे बड़ी चुनौती है। सुबह से लेकर रात तक कटौती और लो वोल्टेज ने लोगों का हाल बेहाल कर रखा है। खपत बढ़ने से फीडरों का लोड बढ़ गया है और अधिकतर फीडर 200 एंपियर के लोड पर चल रहे हैं। जिन उपकेंद्रों पर भार अधिक है, वहां पर कटौती के साथ ट्रिपिंग की समस्या अधिक है। रात में बिजली की चोरी से लाइन लॉस भी बढ़ रहा है।
शहर के तिलियाकोट, गोराबाजार, इंदिरा नगर, प्रगतिपुरम, आईटीआई, आचार्य द्विवेदी नगर के उपकेंद्रों पर बिजली की खपत का भार अधिक है। उपकेंद्रों पर लोड बढ़ा हुआ है जिस कारण निर्बाध बिजली आपूर्ति में दिक्कत आ रही है। शहर में रात के समय हर दिन दो घंटे की कटौती हो रही है तो दिन में भी बिजली की आवाजाही बनी रहती है। शाम को लो वोल्टेज की सबसे अधिक समस्या रहती है।
शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली व्यवस्था बेपटरी है। लाइन लॉस का हाल यह है कि शहर में यह 25 फीसदी तक पहुंच गया है। शासन स्तर से लाइनलॉस को 18 फीसदी तक लाने का निर्देश जारी किया गया है लेकिन लाइनलॉस घटने का नाम नहीं ले रहा है। बिजली चोरी के चेकिंग अभियान पूरी ताकत से नहीं चलाए जा रहे हैं, जिसका असर बिजली व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
जितनी बिजली मिल रही है, उसी के अनुरूप बिजली की आपूर्ति हो रही है। बिजली की खपत बढ़ी है। ट्रांसमिशन से ही कटौती की जा रही है। लाइनलॉस को नियंत्रित किया जाएगा।
- आरएल सरोज, अधीक्षण अभियंता
बिजली की अघोषित कटौती से ग्रामीण परेशान
हलोर (रायबरेली)। भीषण गर्मी में बिजली की अघोषित कटौती से लोग बेहाल हैं। ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे बिजली आपूर्ति का रोस्टर जारी किया गया है, लेकिन हलोर में आठ घंटे भी बिजली नहीं मिल पा रही है। बिजली की अघोषित कटौती से कस्बों की पेयजल व्यवस्था चरमरा गई है। आटा चक्की न चलने से लोगों को महराजगंज कस्बे की ओर भागना पड़ रहा है।