सीआईआई के चेयरमैन आकाश गोयनका का कहना है कि कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने ये कदम उठाया है। वैसे भी चार साल से दो हजार के नोट छप ही नहीं रहे थे। बाजार में प्रचलन काफी कम था। नोट बदलने के लिए भी पर्याप्त समय दिया गया है।
द इंडस इंटरप्रैन्योर (टाई) यूपी के कोषाध्यक्ष राव विक्रम सिंह का कहना है कि इकोनॉमी के लिए यह फैसला अच्छा है। भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार है। कालेधन के संग्रह की वजह से ही हजार का नोट हटाया गया था। दो हजार के नोट जिनके पास अघोषित हैं और भारी मात्रा में हैं, उनके लिए बड़ी चोट होगी।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष आलोक अग्रवाल का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से बाजार में दो हजार के नोट काफी दिख रहे थे। कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए सरकार का यह फैसला है। उम्मीद है कि इस फैसले से साफ-सुथरे लोगों को परेशानी नहीं होगी।
प्रोविंशियल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (पीआईए) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज बंका का कहना है कि कोरोना के बाद कारोबार अभी तक पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट पाया है। वैसे भी डिजिटल लेनदेन में नकदी पहले ही घट गई थी। भले कोई न असर हो लेकिन इस तरह के फैसले कारोबार को झटका देते हैं।
इंटरप्रैन्योरशिप आर्गनाइजेशन (ईओ) के अध्यक्ष सुदीप गोयनका का कहना है कि दो हजार के नोट केवल 11 फीसदी बचे हैं। ज्यादातर कारोबार डिजिटल फार्म में चला गया है। बिजनेस को इस फैसले के कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन जो कैश में लेनदेन करते हैं और डिजिटल रूप से मजबूत नहीं है, उनके लिए जरूर चुनौती है।
लखनऊ व्यापार मंडल के अध्यक्ष अमरनाथ मिश्रा का कहना है कि बाजार में पिछले दो-तीन वर्षों से दो हजार का नोट बहुत कम या न के बराबर आ रहा है। अब सरकार की घोषणा के बाद और ज्यादा आएगा। अधिकारी व्यापारियों का उत्पीड़न न करें। जो रुपये आएगा, वह बैंक जाएगा।
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रवक्ता सुरेश छबलानी का कहना है कि दरअसल लोगों ने पूरी खबर सुनी या पढ़ी नहीं और घबरा गए। हालांकि सरकार का फैसला अच्छा है। घबराने की जरूरत नहीं, सरकार ने पैसे जमा करने का मौका दिया है।
उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष संजय गुप्ता का कहना है कि 2000 रुपये का नोट बंद होने से बाजार पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा। डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ते देश को कोई समस्या नहीं होगी। जो काला धन जमा करते हैं, उन्हें दिक्कत होगी।