नेपाल में आए भूकंप की जमीनी हकीकत देख रूह कांप गई। वहां पर फंसे लोग एक पल भी रूकना नहीं चाहते हैं। खाने पीने की चीजों से लेकर हर चीज दुश्वार है।
जिंदगी को बचाने की जद्दोजहद का आलम ये है कि लोग टकटकी लगाए देख रहे हैं कि कौन सी बस या गाड़ी उनको इस बर्बाद हो चुके नेपाल से बाहर निकाल दे। अपना सब कुछ लुटा और गवां चुके लोग अब जान बचाने के लिए भूखे प्यासे दौड़ रहे हैं।
ये दास्तां चारबाग रोडवेज डिपो की बस लेकर लौटे ड्राइवर अब्दुल करीम की है। वह बताते हैं कि रविवार रात को वे बस लेकर रवाना हुए और सोमवार रात को दस बजे काठमांडू पहुंचे। नेपाल सीमा में घुसते ही बर्बादी और मौत का सन्नाटा टूट जाता है।
हर ओर अजीब सी शांति है और लोग सिर्फ तबाह हो चुके इलाकों से दूर हो जाना चाहते हैं। करीम बताते हैं कि सिनहौली बॉर्डर से 60 पैसेंजर लेकर निकले तो लोगों के चेहरे पर ऐसी खुशी दिखी जैसे वो अपना सब कुछ पा चुके हैं।