लखनऊ। जहरीले जीवों के काटने व जहरीला पदार्थ गटकने वालों में गुर्दा फेल होने का खतरा अधिक होता है। शरीर में जहर पहुंचते ही गुर्दे को रक्त प्रवाह करने वाली धमनियों प्रभावित होती हैं। इससे पेशाब कम हो जाता है, शरीर में मौजूद इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बिगड़ जाता है। रोगी को तुरंत उपचार देकर जहर को नियंत्रित करने के साथ इलेक्ट्रोलाइट संतुलन और जरूरत पड़ने पर डायलिसिस करानी पड़ती है। उपचार में देरी पर यह जानलेवा हो सकता है।
ये जानकारी ये जानकारी इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी के 54वें इंटरनेशनल अधिवेशन के समापन पर पीजीआई के नेफ्रोलाॅजी विभाग के प्रमुख प्रो. नारायण प्रसाद ने दी। उन्होंने बताया कि किडनी खराब होने पर शरीर में नमक और पानी जमा होने लगता है। इसके साथ ही हार्मोनल असंतुलन और रक्त नलिकाओं पर बढ़ा दबाव ब्लड प्रेशर को लगातार ऊंचा बनाए रखता है। लंबे समय तक अनियंत्रित रक्तचाप दिल, दिमाग और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
उन्होंने बताया कि गुर्दा रोगियों में दाद खतरा अधिक होता है। गुर्दे की समस्या, डायलिसिस व प्रत्यारोपण वाले रोगियों के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इनके शरीर में वैरीसेला-जोस्टर वायरस की वजह से चिकनपॉक्स और दाद हो जाता है। गुर्दा रोगियों को दाद का टीका लगवाना चाहिए। टीकाकरण से बीमारी को रोकने या इसकी गंभीरता को कम करने में मदद मिलती है।